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वेतन वृद्धि रोकी तो हाईकोर्ट जाएगा स्नात्तकोत्तर अध्यापक संघ

Thu, 16 Aug 2018 06:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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बोर्ड परीक्षाओं में 25 फीसदी से कम परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश स्नात्तकोत्तर अध्यापक संघ ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की धमकी दी है।

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संघ के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन कालटा ने कहा है कि बिना छानबीन किए वार्षिक वेतन वृद्धि रोकना गलत है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

कालटा ने कहा है कि शिक्षा एक त्रिकोणीय प्रक्रिया है। इसमें शिक्षक, शिक्षार्थी और समाज आते हैं। पूर्व सफलता के लिए तीनों धुरियों का आपसी समन्वय होना आवश्यक है। छात्र एक विषय शिक्षक के पास पूरे दिन में 35 से 40 मिनट रहता है। स्कूल में विद्यार्थी छह घंटे होता है।
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घर और समाज में विद्यार्थी 18 घंटे रहता है। ऐसे में सिर्फ शिक्षक को कम परिणाम के लिए दोषी मानना गलत है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में अध्यापकों सहित मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। इसको लेकर उच्च न्यायालय भी सवाल उठा चुका है। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही स्कूलों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

संघ के अध्यक्ष ने कहा पहली से आठवीं कक्षा तक फेल न करने की नीति भी बोर्ड परीक्षाओं में कम परिणाम आने के लिए जिम्मेवार है। इसके अलावा शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्य लिए जा रहे हैं। जिस कारण स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणामों को प्रभावित करने वाले तथ्यों की जांच किए बिना और चेतावनी पत्र जारी किए बिना शिक्षकों को दंडित करना अन्याय है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस संदर्भ में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री सहित शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

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