हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यों तथा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्यपाल उर्मिला सिंह को ज्ञापन सौंपा, जिसमें भाजपा पर विधानसभा में गैर जिम्मेदाराना विपक्ष की भूमिका निभाने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि भाजपा के नेता सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए अलोकतांत्रिक व्यवहार कर रहे हैं।
सुक्खू ने कहा कि भाजपा किसी भी तरीके से प्रदेश की कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन उसकी हसरतें पूरी होने वाली नहीं हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में सरकार एकजुट व स्थिर है। जनता ने सरकार को पांच वर्षों के लिए जनादेश दिया है। सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। विधानसभा के तीन सत्रों में भाजपा के नेता सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचा रहे हैं।
धर्मशाला में शीतकालीन सत्र में कुल 6 बैठकें, बजट सत्र में कुल 14 बैठकें तथा मानसून सत्र में कुल 5 बैठके हुईं, जिसमें भाजपा के नेताओं ने एक दिन भी कार्यवाही नहीं चलने दी। इससे स्पष्ट है कि भाजपा के नेताओं को प्रदेश के विकास से कोई सरोकार नहीं है।
सरकार की ओर से मानसून सत्र को 16 दिन का करने के पीछे मंशा थी कि प्रदेश के विकास तथा लोगों के कल्याण से संबंधित मामलों पर चर्चा होगी, लेकिन भाजपा ने पूरे सत्र में केवल शोरशराबा किया। भाजपा नेता विधानसभा में नियम 67 के तहत चर्चा पर अडे़ रहे, जबकि मामला अदालत में विचाराधीन है।
प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब विपक्ष ने विधानसभा के किसी भी सत्र को नहीं चलने दिया। विपक्ष अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असफल रहा है इसके लिए विपक्ष को जनता से माफी मांगनी चाहिए। ज्ञापन देने वालों में मंत्री सुधीर शर्मा, जीएस बाली, ठाकुर सिंह भरमौरी, प्रकाश चौधरी, मुकेश अग्निहोत्री सहित अन्य मंत्री शामिल थे।