सीबीएसई की तर्ज पर राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड बच्चों को गणित के प्रश्न पत्र के लिए विकल्प देगा। बेसिक मैथ और स्टैंडर्ड मैथ पर आधारित बोर्ड वार्षिक परीक्षाओं के लिए दो प्रश्न पत्र तैयार करेगा।
परीक्षार्थियों को इन दो प्रश्नपत्रों में से एक को चुनना होगा। बोर्ड के इस फैसले से उन हजारों बच्चों को लाभ मिलेगा, जो गणित में कमजोर होने के कारण पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।
शुरुआती दौर में मैट्रिक में इसे शुरू किया जाएगा। जबकि इसके सफल परिणाम को देखकर अन्य कक्षाओं में भी शुरू किया जा सकेगा। इसके अलावा अन्य प्रश्न पत्रों में भी बोर्ड बदलाव करके 40:40:20 के अनुपात प्रश्नों की संख्या रखेगा।
प्रत्येक प्रश्न पत्र में 40 फीसदी आसान, 40 फीसदी मध्यम दर्जे के प्रश्न पूछे जाएंगे, जबकि 20 फीसदी प्रश्नों का स्तर ऊंचा होगा। ऐसे में जहां निम्न दर्जे के विद्यार्थियों को पास होने में आसानी होगी।