ऐसे में शिक्षा बोर्ड की ओर से परीक्षा परिणाम में इतनी बड़ी चूक को लेकर कार्यप्रणाली पर भी सवाल भी उठने लगे हैं। इस मानवीय भूल के चलते ढाई हजार से अधिक विद्यार्थियों को पास होने के बावजूद फेल कर दिया गया था, जबकि अंग्रेजी विषय में 2009 विद्यार्थियों को पास होने के बावजूद कंपार्टमेंट घोषित कर दिया गया था, जिन्हें अब रिवाइज परीक्षा परिणाम में राहत मिली है। गौर रहे कि प्रदेशभर में 86,373 विद्यार्थियों ने जमा दो की परीक्षा दी थी। बोर्ड की ओर से 17 मई को घोषित परीक्षा परिणाम में 71,591 विद्यार्थी परीक्षा पास किए गए थे। बुधवार को दोबारा निकले परिणाम में 76,315 विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की है। पहले 8581 विद्यार्थी परीक्षा फेल और 5847 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट थी। अब 5868 विद्यार्थी फेल और 3838 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट है। उधर, प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि बोर्ड की ओर से प्रोविजनल मेरिट सूची जारी की गई है, लेकिन पुनर्मूल्यांकन और पुनर्निरीक्षण के बाद फाइनल मेरिट सूची जारी की जाएगी। उन्होंने माना कि मेधावियों की रैंकिंग में संशोधित परिणाम से असर पड़ेगा।
अधिकारियों की फौज, फिर भी हो गई चूक
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड में ऊपर से लेकर नीचे तक अधिकारियों की फौज भरी पड़ी है। इसके बावजूद बोर्ड के बारहवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में बड़ी चूक हो गई। वर्तमान में बोर्ड सचिव के पद पर एचएएस अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा सेवारत हैं। इसके अलावा बोर्ड में 8 उप सचिव, 14 सह सचिव, एक अतिरिक्त सचिव समेत अन्य अधिकारी बोर्ड में सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश सरकार ने बीते माह बोर्ड सचिव का तबादला किया था, लेकिन बाद में सरकार ने तबादला आदेश रद्द कर दिए थे। बोर्ड में चेयरमैन का पद खाली है। वर्तमान में आईएएस अधिकारी हेमराज बैरवा के पास बोर्ड चेयरमैन का अतिरिक्त कार्यभार है।
मेरिट से खुशियां बटोरने वाले कई मेधावियों को भी लगा झटका, कई रैंकिंग से लुढ़के
पूर्व में दूसरे स्थान पर 3 बच्चे थे, अब 2 रह गए हैं। तीसरे स्थान पर पूर्व में 7 विद्यार्थी थे अब 2, चौथे स्थान पर पहले 3 थे अब 5, पांचवें स्थान पर पहले 4 थे अब भी 4 ही हैं। जबकि छठे स्थान पर पूर्व में 2 थे अब 1, सातवें स्थान पर पूर्व में 10 थे अब 11 हुए, आठवें स्थान पर पूर्व में 15 थे अब 11, नौवें स्थान पर पूर्व में 13 थे अब 10 रह गए, दसवें स्थान पर पूर्व में 12 विद्यार्थी थे, लेकिन संशोधन के बाद 13 हो गए हैं। कई विद्यार्थी टॉप-10 सूची से बाहर हो गए हैं।