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ट्रिब्यूनल के लंबित केस हाईकोर्ट शिफ्ट करने का विधेयक हंगामे के बीच पारित, विपक्ष ने किया वॉकआउट

Thu, 29 Aug 2019 02:15 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रशासनिक ट्रिब्यूनल खत्म करने के बाद लंबित मामले हाईकोर्ट शिफ्ट करने के विधेयक पर गुरूवार को सदन में खूब हंगामा हुआ। विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर कर्मचारियों से नाइंसाफी करने का आरोप लगाया। शोर-शराबे और हंगामे के बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष के बाहर जाते ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वाकआउट की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक लक्ष्य बताया। इसके बाद बगैर विपक्ष के सदन में हां में हां मिलाते हुए सत्ता पक्ष ने बिल पारित कर दिया। 

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बुधवार को भोजनावकाश से पहले चर्चा और नोकझोंक के बीच दो विधेयक पारित होने के बाद सीएम ने सदन में तीसरे हिमाचल प्रशासनिक अभिकरण (विनिश्चित मामलों और लंबित आवेदनों का अंतरण) विधेयक 2019 पारित करने का प्रस्ताव रखा तो इसी पर हंगामा शुरू हो गया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत अन्य कांग्रेस विधायकों ने इसे कर्मचारियों से नाइंसाफी करार दिया।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हंगामे के बीच जवाब देने के लिए खडे़ हुए तो इस बीच विपक्ष के विधायकों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। अग्निहोत्री ने सरकार पर विपक्ष की बात नहीं सुनने और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया। माकपा विधायक राकेश सिंघा भी साथ में थे।

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भाजपा कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद करें

कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में बहुत बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं। कांग्रेस ने हमेशा कर्मचारियों का ख्याल रखा। भाजपा सरकार ने ट्रिब्यूनल खत्म कर कर्मचारियों से नाइंसाफी की है। कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद करें।  

हरियाणा में भी ट्रिब्यूनल खोलने की जरूरत महसूस की
कांग्रेस विधायक हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि हरियाणा में भी भाजपा की ही सरकार ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल खोलने की जरूरत महसूस की है। यहां बंद करने का फैसला गलत है।

मंत्रियों की महंगी गाड़ियां वापस लेकर उन्हें छोटी गाड़ियां दें : सिंघा 
माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल खत्म कर अर्थव्यवस्था बचाने की बात करना बहाना है। इसके लिए मंत्रियों की महंगी गाड़ियां वापस लेकर उन्हें छोटी गाड़ियां दें। मानसून सत्र से पहले अध्यादेश लाने का औचित्य नहीं था। 

जल्दबाजी में नहीं, कर्मचारियों की राय लेकर लिया फैसला
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरे देश में ट्रिब्यूनल केवल छह प्रदेशों में ही खोले गए हैं। उड़ीसा ने भी अभी बंद किया है। यह निर्णय जल्दबाजी में नहीं हुआ। गंभीर चर्चा के बाद ही फैसला हुआ है। इसके लिए कर्मचारियों की भी सलाह ली गई है। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल में 21 हजार मामले लंबित थे। हाईकोर्ट में इन मामलों का ठीक न्यायसंगत तरीके से निपटारा होगा।
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