विधायक के करीबी के घर छापा मारने वाले डीएसपी के तबादले पर ट्रिब्यूनल ने रोक लगा दी है।
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प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण ट्रांसफर किए गए डीएसपी (सीआईडी) ऊना सागर चंद्र के तबादला आदेशों पर तब तक अमल न करे, जब तक पुलिस विभाग डीएसपी के आवेदन पर अंतिम फैसला नहीं ले लेता।
ट्रिब्यूनल अध्यक्ष न्यायाधीश बीके शर्मा और प्रशासनिक सदस्य प्रेम कुमार की खंडपीठ ने सागर चंद्र के आवेदन का निपटारा करते यह आदेश पारित किए। ट्रिब्यूनल ने 27 मई को डीएसपी के तबादला आदेशों पर रोक लगा दी थी।
सरकार ने इस आवेदन पर अपना जवाब देते हुए बताया कि विभाग 15 दिनों में प्रार्थी डीएसपी के आवेदन पर फैसला ले लेगा। उल्लेखनीय है कि डीएसपी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसे स्थानीय एमएलए राकेश कालिया द्वारा किए गए राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण तबादला कर महज सात महीने में ऊना से सिरमौर भेजा जा रहा है।
आरोप लगाया था कि क्षेत्र में केरोसिन तेल के अवैध धंधों पर रेड डालने के बाद उसे प्रताड़ना स्वरूप तबादला कर क्षेत्र से बाहर न्यूनतम कार्यकाल पूरा किए बगैर भेजा जा रहा है। प्रार्थी का कहना है कि पुलिस नियमों के अनुसार कम से कम दो वर्ष के लिए किसी पुलिस वाले को एक स्थान पर बने रहने का हक है। प्रार्थी ने अपने तबादला आदेशों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत बताते हुए इसे रद्द करने की गुहार लगाई थी।