मंडी लोकसभा सीट से भाजपा ने उतारा पैराशूट प्रत्याशी : प्रतिभा
भाजपा को रामपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए दूसरे जिले से उम्मीदवार लाना पड़ा और अब मंडी लोकसभा चुनाव के लिए भी किसी भाजपा कार्यकर्ता को चुनाव में खड़ा न कर मुंबई से एक अभिनेत्री को लाना पड़ा। यह बात कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कलेडा-मझोली टिक्कर में आयोजित जनसभा में कही। उन्होंने कहा कि आप समझ सकते हैं कि भाजपा का कोई स्थानीय कार्यकर्ता उनके बैनर में चुनाव भी नहीं लड़ सकता। इसके विपरीत जहां तक कांग्रेस उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह का सवाल है तो भाजपा को यह समझ लेना चाहिए कि एक लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत वह युवा अध्यक्ष बने और उसके बाद लोगों ने उन्हें चुनकर विधानसभा भेजा। लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए जनता ने उन्हें एक बार नहीं, तीन बार अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए विधानसभा में भेजा। उनके काम करने के तरीके और विधानसभा में मुद्दों को रखने की उनकी काबिलियत के उनके राजनैतिक विरोधी भी कायल है। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में जनता से समर्थन मांगा। इस दौरान शिमला जिला परिषद उपाध्यक्ष सुरेंद्र रेटका, रामपुर ब्लॉक कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष चुन्नी लाल सहित अन्य वक्ताओं ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
कंगना के पीआरओ बन मंच का संचालन कर रहे जयराम : संजय
प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष संजय अवस्थी ने भाजपा को भ्रष्टाचार की जननी बताते हुए कहा कि जिस पार्टी के नेताओं ने कोविड के दौरान पीपी किट, सैनिटाइजर और मास्क तक के घोटाले किए हों, आज वह खुद के ईमानदार होने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को उस समय अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। भाजपा के नेता आज कांग्रेस पर झूठे व आधारहीन आरोप लगाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। सोमवार को जारी बयान में अवस्थी ने कहा कि जयराम ठाकुर कंगना के पीआरओ बनकर उनका स्टेज संचालन कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री को मंडी संसदीय सीट पर जिस प्रकार पसीना बहाना पड़ रहा है, उसे देखकर उन पर तरस आ रहा है। मंडी संसदीय क्षेत्र में उनके प्रत्याशी की हार निश्चित है। लोग अभिनेता को नहीं, नेता को पसंद करते हैं। जयराम ठाकुर के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि छल-कपट से भाजपा ने राज्यसभा की सीट को जीता है, जबकि बहुमत कांग्रेस के पास है। जयराम सीएम रहते हुए प्रदेश में मंडी संसदीय सीट सहित प्रदेश के तीन उपचुनाव बुरी तरह हारे थे, उस समय उन्होंने अपना मुख्यमंत्री का पद क्यों नहीं छोड़ा।