नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार के ऊपर लगाए जा रहे आरोपों और सुक्खू सरकार के रवैये के चलते भाजपा ने बैठक का बहिष्कार किया और बीच बैठक से बाहर चले आए। कहा कि यह सरकार सिर्फ ओछी राजनीति कर रही है। सर्वदलीय बैठक में प्रेजेंटेशन के दौरान गुमराह करने वाले झूठे आंकड़े दिए जा रहे हैं, जो सिर्फ राजनीति से प्रेरित हैं। मुख्यमंत्री आए दिन बैठक पर बैठक बुला रहे हैं, लेकिन वह खुद कंफ्यूज हैं कि उन्हें करना क्या है। 12वें वित्त आयोग के समय से ही राजस्व घाटा अनुदान बंद करने की पैरवी आयोग द्वारा की जाती रही है। 13वें वित्त आयोग के समय हिमाचल को मात्र 7800 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा अनुदान दिया गया। 14 वें वित्त आयोग में हिमाचल प्रदेश को 40,000 करोड़ से ज्यादा का राजस्व घाटा अनुदान मिला जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में दिया गया, तब हिमाचल में कांग्रेस की सरकार थी। 15वें वित्त आयोग ने भी राजस्व घाटा अनुदान खत्म करने की वकालत की। कोविड जैसी महामारी के बीच राजस्व घाटा अनुदान मिला लेकिन उसे टेंपर्ड डाउन किया गया।