समितियां ऐसे करेंगी काम
ग्राम पंचायतों के लिए खंड विकास अधिकारी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। जबकि पंचायत सचिव सदस्य सचिव होगा। इसी तरह पंचायत समिति के लिए समिति में मुख्य कार्यकारी अधिकारी पंचायत समिति को अध्यक्ष और सामाजिक शिक्षा और खंड योजना अधिकारी सदस्य होगा। यह पद खाली होने की स्थिति में बीडीओ की ओर से नामित एक अधिकारी शामिल होगा। सदस्य सचिव के रूप में पंचायत निरीक्षक या उप निरीक्षक नियुक्ति होंगे। जिला परिषद के लिए समिति में मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अध्यक्ष जिला विकास अधिकारी सदस्य और जिला पंचायत अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया गया है। केंद्रीय वित्त आयोग अनुदान के संबंध में भुगतान के उद्देश्य से, सदस्य सचिव संबंधित पंचायतों के लिए मेकर होंगे और समिति के अध्यक्ष चेकर होंगे।
विभाग के अनुसार पूरे हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थानों के मौजूदा चुने हुए प्रतिनिधियों का कार्यकाल(सब डिवीजन केलांग की सभी ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों, लाहौल-स्पीति, जिला चंबा के सब डिवीजन पांगी में ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों और जिला कुल्लू की चार ग्राम पंचायतों को छोड़कर) 31 जवरी को को समाप्त हो गया है। साथ ही आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू होने के कारण ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के पुनर्गठन के लिए चुनाव नहीं हो सके। ऐसे में प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के अनुसार इनकी अवधि समाप्त होने पर भंग माना जाएगा।
हिमाचल में अब तक 55.19 लाख वोटर
राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक प्रदेश में 55.19 लाख मतदाता हैं। इसमें करीब 27,93,161 पुरुष और 27,26,548 महिलाएं शामिल हैं। कांगड़ा में 13,17,390, बिलासपुर में 330655, चंबा में 422091, हमीरपुर में 378151, किन्नौर में 5887, कुल्लू में 335042, लाहौल स्पीति में 25602, मंडी में 865432, शिमला में 517149, सिरमौर में 411481, सोलन में 420552, ऊना में 437287 मतदाता हैं।