कानून की प्रक्रिया को मध्य नजर रखते हुए चुनाव करवाने में अभी और 6 महीना का वक्त लगेगा। अगर आज की तारीख में आरक्षण रोस्टर भी जारी कर दिया जाता है तब भी चुनाव करवाने में कम से कम 90 दोनों का वक्त लगेगा। वहीं, राज्य चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि चुनाव करवाने में आगे और दिक्कतें होंगी। फरवरी और मार्च के महीने में प्रदेश में चुनाव करवाना संभव नहीं है। इस दौरान बच्चों की परीक्षाएं शुरू हो जाती है और कर्मचारी परीक्षाओं में व्यस्त रहते हैं। मई के बाद कर्मचारी जनगणना की ड्यूटी में तैनात किए जाएंगे और जुलाई और अगस्त के महीने में प्रदेश में भारी वर्षा शुरू हो जाती है।
वहीं, दूसरी ओर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने सरकार की दलीलों का खंडन करते हुए कहा कि पंचायत चुनाव को जानबूझकर समय पर नहीं करवाया जा रहा है। सरकार को परिसीमाओं के गठन के लिए पिछले 1 साल का समय था लेकिन सरकार आपदा का रोना रोती रही। उन्होंने अदालत से मांग की है सरकार जो नई परिसीमा का गठन कर रही है वह भविष्य के लिए हो और वर्तमान में पुरानी जनगणना के आधार पर पंचायती चुनाव सुनिश्चित कराएं जाए। दलीलें दी गई कि सरकारी मशीनरी चुनाव करवाने में पूरी तरह से फेल हो गई है। पंचायती चुनाव एक संवैधानिक संस्था है जिसके तहत चुनाव की अवधि समाप्त होने के 6 महीने के भीतर फिर से चुनाव करवाना अनिवार्य है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि सरकार को निर्देश दिए जाएं कि पंचायती चुनाव को समय पर करवाएं।इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ कर रही है।