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एचपीएनएलयू विवाद: छात्र के जातीय उत्पीड़न के आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR; कुलपति ने आरोपों को बताया निराधार

Fri, 02 Oct 2026 09:38 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचपीएनएलयू) में छात्र निखिल के आत्महत्या प्रयास के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। छात्र की शिकायत पर पुलिस ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(आर) और बीएनएस की धारा 351(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। छात्र ने विश्वविद्यालय में जातीय आधार पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को निराधार बताया है। पढ़ें पूरी खबर...

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एफआईआर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचपीएनएलयू) में छात्र के आत्महत्या के प्रयास के मामले में अब जातीय उत्पीड़न के आरोपों को लेकर पुलिस कार्रवाई हुई है। छात्र की शिकायत के आधार पर बालूगंज पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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पुलिस ने छात्र की शिकायत पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) और बीएनएस की धारा 351(2) के तहत मामला दर्ज किया है। छात्र निखिल ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में उसे जातीय आधार पर भी प्रताड़ित किया गया।
 

हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने कहा कि मामले को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर जांच चल रही है और जांच पूरी होने से पहले किसी भी आरोप को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

कुलपति बोलीं- जातिगत भेदभाव के आरोप निराधार
विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की शिकायतों और समान अवसर से जुड़े मामलों के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ मौजूद है।

कुलपति के अनुसार विश्वविद्यालय में सभी विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामला छात्रों के बीच लंबे समय से चले आ रहे आपसी विवाद और झगड़े से जुड़ा बताया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 21 अगस्त को एंटी रैगिंग स्क्वाड के पास शिकायत आई थी। इसके बाद मामले को एंटी रैगिंग कमेटी के पास भेजा गया और समिति इसकी जांच कर रही है।

निखिल के खिलाफ भी पहले शिकायत का दावा
कुलपति ने बताया कि आत्महत्या का प्रयास करने वाले छात्र निखिल के खिलाफ भी पहले छात्रों से मारपीट और विवाद को लेकर शिकायत दर्ज हो चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम को दोनों पक्षों से जुड़े तथ्यों के आधार पर देखा जा रहा है। कुलपति ने कहा कि एंटी रैगिंग कमेटी की जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।

पिता बेटे को उपचार के लिए दिल्ली ले गए
निखिल के पिता ने बताया कि उनके बेटे की हालत अभी ठीक नहीं है। बेटे की स्थिति को देखते हुए वह छुट्टी लेकर उसे अपने साथ दिल्ली ले गए हैं, जहां उसका उपचार करवाया जाएगा। घटना के बाद छात्र को पहले धामी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। इसके बाद उसे आईजीएमसी शिमला लाया गया।

धामी में करीब दो घंटे रखा, आईजीएमसी में भर्ती नहीं हुआ
कुलपति ने बताया कि घटना के बाद निखिल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धामी ले जाया गया था। वहां उसे करीब दो घंटे रखा गया। कुलपति के अनुसार इस दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों को छात्र से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद छात्र को आईजीएमसी शिमला ले जाया गया। कुलपति के अनुसार आईजीएमसी में छात्र को भर्ती नहीं किया गया और सुबह उसे उसके परिजनों के साथ भेज दिया गया। कुलपति ने यह भी कहा कि अब तक पुलिस की ओर से विश्वविद्यालय के हॉस्टल की जांच नहीं की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है।

एंटी रैगिंग कमेटी की जांच जारी
मामले में फिलहाल विश्वविद्यालय की एंटी रैगिंग कमेटी की जांच जारी है। कुलपति ने कहा कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने छात्रों की समस्याओं को समय रहते सामने लाने और उनका समाधान करने के लिए मेंटर-मेंटी कार्यक्रम को भी महत्वपूर्ण बताया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि छात्र अपनी समस्याएं समय पर प्रशासन के सामने रख सकें।
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फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की प्राथमिकी और विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच, दोनों अलग-अलग स्तर पर आगे बढ़ रही हैं। छात्र की ओर से लगाए गए आरोपों और विश्वविद्यालय प्रशासन के पक्ष के बीच अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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