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हिमाचल में भी हो सकती है केदारनाथ जैसी त्रासदी

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हिमाचल में भी उत्तराखंड के केदारनाथ जैसी त्रासदी हो सकती है। लाहौल-स्पीति के गिपंगत ग्लेशियर पर 80 हेक्टेयर की एक गहरी झील बन गई है।
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इसके टूटने की स्थिति में शिशु गांव के तबाह होने की आशंका व्यक्त की गई है। प्रदेश सरकार की पर्यावरण एवं विज्ञान तकनीकी परिषद की ओर हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है।

इसकी रिपोर्ट परिषद की ओर से प्रदेश सरकार को सौंपी जा चुकी है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी ग्लेशियरों की मानीटरिंग शुरू कर दी गई है।

केदारनाथ में जून 2013 को आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश पर्यावरण एवं विज्ञान तकनीकी परिषद की ओर से सूबे के ग्लेशियरों पर एक अध्ययन किया गया।
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अध्ययन में खुलासा, कभी भी हो सकती है त्रासदी

अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि चिनाब नदी के गिपंगत और समुद्र टापू ग्लेशियर पर दो खतरनाक झीलें बन गई हैं। इससे कभी भी खतरा पैदा हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार गिपंगत ग्लेशियर पर 80.12 हेक्टेयर की और समद्र टापू ग्लेशियर पर 147.31 हेक्टेयर की झील बन गई है। गिपंगत ग्लेशियर पर बनी झील बेहद गहरी है।

इसके टूटने की स्थिति में शिशु गांव नष्ट होने का खतरा है। परिषद की ओर से इसकी रिपोर्ट प्रदेश सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन को भेज दी गई है।
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सरकार को भेजी गई रिपोर्ट

इसकी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी जा चुकी है। प्रदेश सरकार के निर्देश के बाद प्रदेश भर के ग्लेशियरों की मानीटरिंग शुरू कर दी गई है।

हिमाचल देश का पहला राज्य है, जहां सभी ग्लेशियरों की मानीटरिंग शुरू की गई है। जैसे ही कोई महत्वपूर्ण सूचना आएगी, उससे सरकार को अवगत करा दिया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश पर्यावरण एवं विज्ञान तकनीकी परिषद के सदस्‍य सचिव डा. एसएस नेगी का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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