हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग ने नगर नियोजन विभाग के दो योजना अधिकारियों और एक कनिष्ठ अभियंता को पेनल्टी लगाई है। तीनों पर 25 हजार रुपये का यह जुर्माना आरटीआई एक्ट के तहत वांछित सूचना नहीं मिलने पर लगाया गया है।
आयोग ने इस बारे में नगर नियोजन विभाग के निदेशक को भी आदेश जारी किए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों का गंभीर नोट लें और इस संदर्भ में भविष्य में कैजुअल एप्रोच को न दोहराए। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त भीम सेन की कोर्ट ने यह फैसला प्रताप सिंह वर्मा बनाम डिविजनल टाउन प्लानिंग कार्यालय के जनसूचना अधिकारी मामले में सुनाया है।
प्रताप सिंह वर्मा ने एक भवन निर्माण से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र, निरीक्षण आदि के संबंध में आरटीआई मांगी थी। आयोग ने अधूरी और गलत सूचना देने पर तीनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कनिष्ठ अभियंता कश्मीर चंद, प्लानिंग अधिकारी प्रेमलता चौहान और टाउन प्लानिंग अधिकारी राजेंद्र के जवाब को आयोग ने विरोधाभासी और असंतोषजनक पाया।
आयोग ने कहा कि कार्यालय का रिकार्ड देखे बगैर गलत सूचना दी गई। ऐसा प्रतीत होता है कि यह अनजाने में नहीं किया गया। आरटीआई आवेदन में लगभग 100 दिनों से अधिक की देरी की गई है। ऐसे में तीनों पर 25 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई जाती है, जिसे तीनों को ही बराबर हिस्से में सरकारी कोष में जमा करना होगा। टीसीपी निदेशक को भी आदेश की एक प्रति भेजी गई, जिसमें इसका नोट लेते हुए उनसे भविष्य में इस गलती को नहीं दोहराने के निर्देश दिए गए।