सीबीआई ने गुड़िया रेप और हत्या मामले में 22 जुलाई 2017 को दिल्ली में एफआईआर दर्ज की थी। मामले की जांच 23 जुलाई 2017 से शुरू हुई। 10 जनवरी 2018 को सीबीआई ने मामले में आठवीं स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की थी।
सीबीआई ने जांच पूरी करने के लिए हाईकोर्ट से तीन माह का अतिरिक्त वक्त मांगा था। हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच के लिए 78 दिन का समय दिया था। सीबीआई को इस मामले की जांच करते हुए आठ महीने हो गए हैं लेकिन जांच एजेंसी के हाथ अभी तक पुख्ता सुबूत नहीं लगे हैं।
सीबीआई के वकील ने बताया है कि हाईकोर्ट के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई है। मामले की जांच वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ रही है। यह ऐसा केस है जिसमें सभी सबूत पहले ही नष्ट कर दिए थे, फिर भी जांच जारी है।
उन्होंने कहा कि पिछली तारीख से अभी तक जो भी जांच में सामने आया उसकी रिपोर्ट पेश की गई है। कोर्ट ने सीबीआई निदेशक को अगली तारीख पर पेश होने के आदेश दिए हैं।
जन आक्रोश के बाद सीबीआई को सौंपा था केस
गुड़िया मामले को लेकर प्रदेश भर में उग्र विरोध प्रदर्शन हुए थे। बढ़ते जन आक्रोश के चलते पूर्व की कांग्रेस सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया था। हाईकोर्ट ने भी इस मामले को लेकर बरती गई लापरवाही के लिए प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
गुड़िया मामले से जुड़े सूरज लॉकअप हत्याकांड मामले में नौ पुलिस अधिकारी, कर्मचारी गिरफ्तार हैं। सीबीआई ने आईजी जहूर जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, डीएसपी मनोज जोशी सहित अन्य पुलिस कर्मियों को सूरज की हत्या, षडयंत्र रचने और सबूत नष्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
यह सभी आरोपी कंडा जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। जल्द ही सीबीआई द्वारा इन निलंबित पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के वॉयस सैंपल लिए जाने हैं। गुड़िया मामले की जांच को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं।