हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एचआरटीसी के अधिकारियों को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामले में लताड़ लगाई है। कोर्ट ने कहा कि पहले ही सेवानिवृत्त कर्मियों को पेंशन देने बाबत जरूरी दिशा निर्देश जारी किए जा चुके हैं तो क्यों बार-बार कोर्ट के समक्ष सेवानिवृत्त कर्मियों को अवमानना की याचिका दायर करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने नेकराम के मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए एचआरटीसी के अधिकारियों को चेतावनी दी कि इस तरह की पुनरावृत्ति से बचें। गौरतलब है कि एचआरटीसी अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए टालमटोल की नीति अपना रहा है।
इस कारण सैकड़ों मामले हाईकोर्ट और प्रशासनिक प्राधिकरण के समक्ष दायर किए गए हैं। इस तरह के मामलों में हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल की ओर से समय-समय पर प्रार्थियों की पेंशन देने के आदेश जारी किए गए हैं। कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रार्थियों को बार-बार अवमानना याचिका या अनुपालना याचिका दायर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
हिमाचल हाईकोर्ट को मिले चार नए न्यायाधीश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को चार नए न्यायाधीश मिल गए हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।
- फोटो : file photo
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को चार नए न्यायाधीश मिल गए हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। जल्द ही नए न्यायाधीश पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। नए जजों में विवेक सिंह ठाकुर बिलासपुर जिले से हैं। वे वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से बतौर सीनियर पैनल काउंसिल बनाए गए हैं।
इसके अतिरिक्त वे असिस्टेंट एडवोकेट जनरल व एडिशनल एडवोकेट जनरल के पद पर कार्य कर चुके हैं। दूसरे जज अजय मोहन गोयल वर्तमान में एचआरटीसी, एचपीपीसीएल व एचपी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के स्टेंडिंग काउंसिल में कार्य कर रहे हैं। गोयल जिला कुल्लू से हैं। तीसरे जज संदीप शर्मा को साल 2015 में हाईकोर्ट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त किया गया था।
वह ऊना जिला से हैं। ये 10 वर्षों तक असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल के पद पर कार्यरत रहे और वर्तमान में सीबीआई, यूजीसी, बीएसएनएल, सेंट्रल एक्साइज व ईपीएफ के स्टेंडिंग काउंसिल भी हैं। चौथे जज सीबी बारोवालिया वर्तमान में हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार के पद पर तैनात हैं।
लंबे समय तक हाईकोर्ट, प्रशासनिक ट्रिब्यूनल और शिमला के अधीनस्थ न्यायालयों में वकालत करने के बाद इन्हें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद इन्होंने जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मशाला व सोलन के पद पर भी कार्य किया।