हिमाचल हाईकोर्ट ने वन भूमि पर अवैध कब्जा कर सेब बगीचे उगाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आदेश दिए हैं कि वह तीन माह में इन पर केस दर्ज करे।
कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार इन अतिक्रमणकारियों से वन भूमि को कब्जा मुक्त करवाने में असफल रही है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश देते हुए कहा कि वह वन भूमि पर कब्जा करने वालों का पता लगाए और उनको बेदखल करने के लिए विभिन्न कानूनों के तहत प्रक्रिया आरंभ करे।
कोर्ट ने सभी कब्जाधारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह तीन महीनों के भीतर वन भूमि पर अवैध कब्जाधारियों की संपत्तियों की जानकारी जुटाकर ईडी को दे ताकि सेब बेचकर काला धन बनाने वाले अतिक्रमणकारियों पर ईडी के तहत मामले दर्ज हो सकें।
संपत्ति जब्त करने के आदेश
कोर्ट ने ईडी को ऐसे अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्तियों को जब्त करने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने राज्य के विजिलेंस विभाग को आदेश दिए हैं कि वह खासकर शिमला, मंडी, चंबा, कुल्लू और सिरमौर जिलों में तैनात वन और राजस्व अधिकारियों-कर्मचारियों की चल अचल संपत्तियों की जांच करें और हर 6 माह में उनकी संपत्तियों का ब्योरा तैयार करे।
1 साल के भीतर पूरे राज्य में अन डिमार्केटेड वन भूमि की निशानदेही करने के आदेश देते हुए कोर्ट ने इन सभी आदेशों की अक्षरश: अनुपालना का जिम्मा मुख्य सचिव को सौंपा है।
सरकार को भी आदेश, अवैध कब्जाधारियों को संरक्षण देना बंद करे
कोर्ट ने सरकार की ओर से वन भूमि को कब्जा मुक्त करने के लिए कोर्ट के पूर्व में दिए आदेशानुसार की जा रही कार्यवाही को महज कागजी बताते हुए सख्त लहजे में कहा कि सरकार इन अवैध कब्जाधारियों को संरक्षण देना बंद करे।
ऐसे लालची लोगों को बढ़ावा देने से न केवल कानून मानने वाले लोगों का मनोबल गिरता है, बल्कि अवैध कब्जों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी होती है। बिना मिलीभगत के कोई भी वन भूमि पर खड़े पेड़ों को नहीं काट सकता। सरकार को याद दिलाया कि वह राज्य की भूमि की ट्रस्टी है और उसे सरकारी भूमि को नष्ट करने का कोई अधिकार नहीं है।
राजस्व कानूनों को अपडेट करे सरकार: हाईकोर्ट
हिमाचल हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को आदेश दिए है कि वे राजस्व कानूनों में समय-समय पर लाए गए बदलावों को अपडेट करें और इसके लिए विधि विभाग में एक कोडिफिकेशन ब्रांच खोलें। कोर्ट ने आदेशों में कहा है कि यह ब्रांच प्रधान सचिव विधि के नियंत्रण में खोली जाए। इसमें अतिरिक्त विधि सचिव, संयुक्त या उप सचिव या अवर सचिव विधि और दो विधि अधिकारी होने चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि इस ब्रांच को खोलने के लिए अगर अतिरिक्त पदों को सृजित करने की आवश्यकता पड़े तो एक सप्ताह के भीतर इस बाबत कदम उठाएं।
कोर्ट ने उम्मीद जताई कि मुख्य सचिव राजस्व कानूनों को अपडेट करने के लिए एक सप्ताह के भीतर जरूरी कदम उठाएंगे। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि राजस्व से जुड़े कानूनों जैसे एक्ट, रूल, रेगुलेशनों व नोटिफिकेशनों को अभी तक अपडेट नहीं किया गया है।
कोर्ट ने प्रधान विधि सचिव की ओर से इन कानूनों को अपडेट करने के लिए बताए गए तरीके पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह तो इन कानूनों को अपडेट करने में दशकों लग जाएंगे। कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी प्रतिवादियों को 1 नवंबर तक ताजा स्टेट्स रिपोर्ट दायर करने के आदेश भी दिए हैं।