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दागी अफसरों को समय से पहले सेवानिवृत्त करे सरकार : हाईकोर्ट

Wed, 26 Dec 2018 09:05 PM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को दागी अफसरों को समय से पहले सेवानिवृत्त करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार इसके लिए अपनी शक्तियों का उपयोग करे।

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न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने दागी छवि के अधिकारियों को संवेदनशील पदों से हटाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान ये आदेश पारित किए।

हाईकोर्ट ने आदेश जारी किए कि सरकार उन अधिकारियों बाबत कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे, जिनके खिलाफ  सक्षम न्यायालय के समक्ष या तो चालान पेश किए जा चुके हैं या किसी कारणवश चालान पेश नहीं किए गए हैं।
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कोर्ट ने पूछा है कि जिनके खिलाफ  चालान पेश किए हैं, क्या उनके खिलाफ  आरोप तय कर लिए हैं या नहीं। न्यायालय ने संपूर्ण जानकारी दाखिल करने को कहा है, ताकि इन मामलों मे जल्द ट्रायल संपन्न करने के आदेश जारी किए जा सकें।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन अफसरों की छवि संदेहास्पद है, उन्हें संवेदनशील पदों पर न बिठाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए वे लोग अपने आपराधिक मामले से जुड़े रिकॉर्ड से छेड़खानी न करें। 

66 अफसरों की संदेहास्पद है छवि

मार्च 2018 में न्यायालय के समक्ष दायर शपथ पत्र के अनुसार 66 अधिकारियों पर उनकी संदेहास्पद छवि के चलते मामले चल रहे थे। इनमें से 19 संवेदनशील पदों पर तैनात थे।

54 पर विभागीय कार्रवाई चल रही थी, जबकि 12 के खिलाफ  विभिन्न न्यायालयों में आपराधिक मामले चल रहे थे।  54 में से 28 के खिलाफ  जांच पूरी कर ली गई है, जबकि 26 के खिलाफ  जांच चल रही है।

26 में से 16 के खिलाफ  जांच कमिश्नर डिपार्टमेंटल इनक्वायरी और 10 के खिलाफ  विभिन्न विभागों के समक्ष जांच लंबित हैं। कोर्ट ने कमिश्नर डिपार्टमेंटल इनक्वायरी व संबंधित विभागों को आदेश दिए हैं कि वह इन लोगों के खिलाफ  जांच पूरा कर दो माह में अंतिम निर्णय लें।
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हाईकोर्ट ने मांगा एमसी की संपत्तियों का पूरा ब्योरा

उच्च न्यायालय ने नगर परिषद ज्वालामुखी के कार्यकारी अधिकारी को शपथपत्र के माध्यम से एमसी की संपत्तियों का विस्तृत ब्योरा कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए हैं। एमसी को उन सभी संपत्तियों का ब्योरा देना होगा, जो लीज पर दी गई हैं। हाईकोर्ट की ओर से एमसी ज्वालामुखी के अपने एक प्लॉट को पट्टे पर देने से जुड़े मामले में संज्ञान लेते हुए ये आदेश दिए गए।

 मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कार्यकारी अधिकारी को शपथपत्र में यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि नगर परिषद ने प्रार्थी व अन्य लोगों को किस आधार पर सरकारी जमीन पट्टे पर अलॉट की गई है। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार वर्ष 2004 में  कांगड़ा रोड के समीप ज्वालाजी में प्लाट अलॉट किया गया था। उसने 5000 सिक्योरिटी के तौर पर नगर परिषद के पास जमा करवाए थे।

प्रार्थी के अनुसार उसके पिता की लंबी बीमारी के चलते वर्ष 2008 से 2010 तक प्लॉट का किराया जमा नहीं करवा पाया। नगर परिषद का नोटिस मिलने के पश्चात उसने यह राशि ब्याज सहित जमा करवा दी थी। 2010 में नगर परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर प्रार्थी को आश्वासन दिया कि उसे जल्द पिछले प्लॉट की एवज में अन्य स्थान पर प्लॉट अलॉट किया जाएगा। मामले पर सुनवाई 8 मार्च को होगी।
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