मार्च 2018 में न्यायालय के समक्ष दायर शपथ पत्र के अनुसार 66 अधिकारियों पर उनकी संदेहास्पद छवि के चलते मामले चल रहे थे। इनमें से 19 संवेदनशील पदों पर तैनात थे।
54 पर विभागीय कार्रवाई चल रही थी, जबकि 12 के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में आपराधिक मामले चल रहे थे। 54 में से 28 के खिलाफ जांच पूरी कर ली गई है, जबकि 26 के खिलाफ जांच चल रही है।
26 में से 16 के खिलाफ जांच कमिश्नर डिपार्टमेंटल इनक्वायरी और 10 के खिलाफ विभिन्न विभागों के समक्ष जांच लंबित हैं। कोर्ट ने कमिश्नर डिपार्टमेंटल इनक्वायरी व संबंधित विभागों को आदेश दिए हैं कि वह इन लोगों के खिलाफ जांच पूरा कर दो माह में अंतिम निर्णय लें।
उच्च न्यायालय ने नगर परिषद ज्वालामुखी के कार्यकारी अधिकारी को शपथपत्र के माध्यम से एमसी की संपत्तियों का विस्तृत ब्योरा कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए हैं। एमसी को उन सभी संपत्तियों का ब्योरा देना होगा, जो लीज पर दी गई हैं। हाईकोर्ट की ओर से एमसी ज्वालामुखी के अपने एक प्लॉट को पट्टे पर देने से जुड़े मामले में संज्ञान लेते हुए ये आदेश दिए गए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कार्यकारी अधिकारी को शपथपत्र में यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि नगर परिषद ने प्रार्थी व अन्य लोगों को किस आधार पर सरकारी जमीन पट्टे पर अलॉट की गई है। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार वर्ष 2004 में कांगड़ा रोड के समीप ज्वालाजी में प्लाट अलॉट किया गया था। उसने 5000 सिक्योरिटी के तौर पर नगर परिषद के पास जमा करवाए थे।
प्रार्थी के अनुसार उसके पिता की लंबी बीमारी के चलते वर्ष 2008 से 2010 तक प्लॉट का किराया जमा नहीं करवा पाया। नगर परिषद का नोटिस मिलने के पश्चात उसने यह राशि ब्याज सहित जमा करवा दी थी। 2010 में नगर परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर प्रार्थी को आश्वासन दिया कि उसे जल्द पिछले प्लॉट की एवज में अन्य स्थान पर प्लॉट अलॉट किया जाएगा। मामले पर सुनवाई 8 मार्च को होगी।