हिमाचल हाईकोर्ट ने पर्यटन विकास निगम के घाटे में चल रहे 18 में से 9 होटलों को 31 मार्च, 2025 तक संचालन की छूट दे दी है। निगम ने अदालत के 19 नवंबर को प्रदेश के 40 प्रतिशत से नीचे ऑक्यूपेंसी वाले 18 होटलों को 25 नवंबर को बंद करने के आदेश दिए थे। निगम ने फैसला वापस लेने और संशोधन करने के लिए अर्जी दायर की थी। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने अपने पिछले फैसले को बरकरार रखते हुए हल्की राहत दी है।
पर्यटन निगम की ओर से पूर्व महाधिवक्ता श्रवण डोगरा ने अदालत को बताया कि निगम को घाटे से उबारने के लिए कुछ समय दिया जाए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पर्यटन को पहले कोविड के कारण नुकसान हुआ, उसके बाद प्राकृतिक आपदा का सामना करना पडा। श्रवण डोगरा ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि घाटे में चल रहे होटल अपग्रेड किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिन होटलों को बंद करने के आदेश दिए हैं, उनमें अधिकतर की एडवांंस बुकिंग है और पेमेंट भी आ गई है। ऐसे में इन्हें बंद किया गया तो पर्यटन उद्योग को बड़ा नुकसान होगा। सैकड़ों लोग बेरोजगार होंगे। उन्होंने अदालत में घाटे में चल रहे होटलों की वित्तीय स्थिति से संबंधित आंकड़े भी पेश किए। पूर्व महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिया है कि भविष्य में ख्याल रखा जाएगा कि इसके सेवानिवृतत्त कर्मचारियों के बकाया का भुगतान समय पर हो। अदालत ने इसके बाद निगम को चायल पैलेस, चंद्रभागा केलांग, देवदार खजियार, कुंजम मनाली, मेघदूत क्यारीघाट, लॉग हट्स मनाली, भागसू मैक्लाेडगंज, नग्गर कैसल कुल्लू और धौलाधार धर्मशाला को 31 मार्च तक खुले रखने के आदेश दिए हैं।