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HP High Court: पसंदीदा जगह नौकरी के चक्कर में दूरदराज क्षेत्रों में तैनाती के आदेश, याचिका खारिज

Mon, 03 Apr 2023 10:25 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

पसंद की जगह पर नौकरी करने के चक्कर में हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारियों को दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वादी और प्रतिवादी को ऐसे स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए जहां उन्होंने पहले कभी सेवाएं न दी हो। 
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हिमाचल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 अपने पसंद की जगह पर नौकरी करने के चक्कर में हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारियों को दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वादी और प्रतिवादी को ऐसे स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए जहां उन्होंने पहले कभी सेवाएं न दी हो। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अंजुल कुमार की याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किए। याचिकाकर्ता अंजुल कुमार ने कमल किशोर के तबादला आदेशों को चुनौती दी थी। आरोप लगाया गया था कि कमल किशोर ने राजनीतिक सिफारिश पर अपना तबादला रद्द करवाया है। 31 अगस्त 2022 को याचिकाकर्ता को झंडूता ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गाह-घोरी से बरठीं किया गया था। बरठीं में तैनात कमल किशोर को याचिकाकर्ता की जगह स्थानांतरित किया गया था लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने 12 सितंबर 2022 को यह आदेश रद्द कर दिए थे और याचिकाकर्ता को गाह-घोरी में ही सेवाएं देने के आदेश दिए थे।

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अतिरिक्त निदेशक के आदेशों को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और अपने तबादला आदेशों पर अमल की गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसके तबादला आदेशों को डीओ नोट के माध्यम से प्रतिवादी ने रद्द करवाया है। मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने जो तबादला आदेश जारी करवाए थे वे भी डीओ नोट के आधार पर जारी करवाए गए थे। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि दोनों ही फार्मासिस्ट राजनीतिक दबाव से खुद को मनपसंद स्थानों पर तैनाती करवाते रहे हैं। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि जिस कर्मचारी ने राजनीतिक सिफारिश के आधार पर अपनी तैनाती पसंदीदा स्थान पर करवाई हो, वह दूसरे के स्थानांतरण आदेशों को राजनीतिक सिफारिश का आरोप नहीं लगा सकता है। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया।

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