शराब पर प्राकृतिक खेती सेस वसूली पर रोक
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शराब पर प्राकृतिक खेती सेस वसूली पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने सरकार को फटकार लगाते हुए इस मामले से संबंधित सारा रिकॉर्ड अपने पास रख लिया है। मामले की आगामी सुनवाई दो अप्रैल को होगी। शराब विक्रेताओं की ओर से वर्ष 2024 में याचिकाएं दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 27 मार्च को जब शराब के ठेकों की नीलामी की गई तो उस समय 23 मार्च 2024 की अधिसूचना को हटा दिया गया लेकिन सरकार ने सितंबर 2024 में एक्साइज पॉलिसी में संशोधन कर 10.37 खंड को फिर जोड़ दिया। इसकी वजह से विक्रेताओं को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकार ने इस पॉलिसी में शराब को बेचने और खरीदने के लिए न्यूनतम मूल्य 10 फीसदी और अधिकतम 30 फीसदी तय किया। सरकार की इस अधिसूचना के तहत अगर शराब को निर्धारित मूल्य से ऊपर या नीचे बेचा गया तो इसके लिए जुमनि का प्रावधान किया है। उल्लंघन करने पर पहली मर्तबा 15 हजार, दूसरी बार 25 हजार, तीसरी दफा 50 हजार और चौथी बार एक लाख रुपये के जुमनि का प्रावधान किया। सरकार की ओर से हर बोतल पर प्राकृतिक खेती सेस 10 रुपये और मिल्क सेस 2 से 5 रुपये तक लिया जाता है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई है।