हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने खुली अदालत में सरकारी स्कूलों में बायोमीट्रिक हाजिरी मशीनें न लगाने पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इसके लिए कोर्ट की ओर से बार-बार आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों में मशीनें लगाने के लिए चार दिन का समय दिया है। मामले की सुनवाई 27 दिसंबर को निर्धारित की गई है। इस मामले में 17 दिसंबर, 2022 को प्रकाशित खबर पर अदालत ने सरकार से पूछा है कि स्पष्ट आदेशों के बावजूद स्कूलों में बायोमीट्रिक हाजिरी मशीनें क्यों नहीं लगाई जा रही है।
खबर के मुताबिक शिमला शहर में 409 स्कूलों में से 20 फीसदी स्कूल अभी बिना बायोमीट्रिक मशीनों के हैं। इसके अलावा प्रदेश के 1999 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में से 1,762 स्कूलों में ही बायोमीट्रिक मशीनें हैं। बता दें कि अदालत ने सभी विभागों में बायोमीट्रिक मशीन से हाजिरी लगाने के आदेश दिए थे। इस बाबत मुख्य सचिव को आदेश दिए गए थे कि वह सभी विभागों, बोर्डों और निगमों को बायोमीट्रिक मशीन से हाजिरी लगाने के निर्देश जारी करें। अदालत ने अफसोस जताते हुए कहा था कि बायोमीट्रिक हाजिरी व्यवस्था लागू करने में प्रदेश सरकार अभी भी गहरी नींद में है। याचिकाकर्ता रजनीश पॉल ने हाईकोर्ट के निर्णय को लागू करने के लिए याचिका दायर की है। अदालत ने उसे वेतन वृद्धि के लिए हकदार ठहराया था।