भाजपा सरकार के बिना बजट के खोले दफ्तर बंद करने का फैसला कैबिनेट ने लिया था। यह जानकारी महाधिवक्ता ने अदालत को दी। अदालत को बताया गया कि मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री ने इस फैसले को स्वीकृत किया था। याचिकाकर्ता ने संशोधित याचिका के माध्यम से इस निर्णय को चुनौती देने की मांग की, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि 12 दिसंबर को कानूनी तौर पर कोई कैबिनेट नहीं थी। शीर्ष अदालत के फैसले के तहत कैबिनेट के सदस्य की संख्या निर्धारित की गई है। कैबिनेट में कम से कम 12 सदस्य और 15 फीसदी से अधिक नहीं हो सकते हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को छूट दी है कि वह हाईकोर्ट की शीतकालीन छुट्टियों में अदालत से मामले पर सुनवाई की गुहार लगा सकता है।
बता दें कि भाजपा नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने जसवां प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र के कोटला बेहड़ और रक्कड़ में उप दंडाधिकारी कार्यालय खोला था। लेकिन, सरकार ने गत 12 दिसंबर को जारी प्रशासनिक आदेशों के आधार पर दोनों कार्यालयों को बंद कर दिया। आरोप लगाया गया है कि बिना कैबिनेट बनाए ही पूर्व कैबिनेट के फैसलों को रद्द किया जा रहा है। याचिका में दलील दी गई कि सरकार की ओर से जारी प्रशासनिक आदेशों से कैबिनेट के फैसलों को निरस्त करना गैर कानूनी है। जबकि, भारतीय संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अदालत को बताया गया कि गत 12 दिसंबर को सरकार ने सभी विभागों के अधिकारियों को दिया गया पुनर्रोजगार समाप्त कर दिया। इसी तरह एक अप्रैल 2022 के बाद कैबिनेट में लिए गए सभी फैसलों की भी समीक्षा किए जाने का निर्णय लिया गया।
सरकार नहीं बता पाई एचपीयू में कब तक हटेगी भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के भर्ती प्रक्रिया मामले में सरकार जवाब दायर करने में नाकाम रही है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दायर करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 13 मार्च को निर्धारित की है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि परिणाम घोषित करने की स्वीकृति कब दी जाएगी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने गत 12 दिसंबर को विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा रखी है। दलील दी गई कि 19 जुलाई 2022 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों और गैर शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत याचिकाकर्ता ने सहायक प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया। साक्षात्कार लेने के बाद सहायक प्रोफेसर के पद को छोड़कर लगभग सभी पदों के परिणाम घोषित कर दिए गए है। आरोप लगाया गया है कि नई सरकार के सत्ता में आते ही 12 दिसंबर को विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया पर लगाई रोक लगाई गई। 24 दिसंबर 2022 को विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार से परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगी। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।