प्रदेश सरकार के चार मंत्रियों चंद्र कुमार, धनीराम शांडिल, हर्षवर्द्धन चौहान और जगत सिंह नेगी ने बुधवार को राज्य सचिवालय में पदभार संभाला। चारों मंत्रियों ने एक सुर में कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार प्रदेश को कर्ज में डूबो कर गई है। रोज के कार्यों को सुचारु तौर पर चलाए रखने के लिए भी सरकारी खजाना खाली हो गया है। अब प्रदेश को वित्तीय तौर पर मजबूत करने के लिए कांग्रेस सरकार खर्चों में कटौती करेगी। चारों मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रदेश के लिए वित्तीय पैकेज की उम्मीद भी जताई। मंत्रिमंडल को संतुलित बताते हुए अगले विस्तार में कमियां दूर करने की बात भी कही। मनपसंद महकमे बताने से गुरेज करते हुए मंत्रियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर फैसला छोड़कर अपना पल्ला झाड़ लिया।सचिवालय में पूजा पाठ करने के बाद मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने पदभार संभाला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार विकास को गति देगी। भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाएगा।
पूर्व सरकार जाते-जाते धड़ाधड़ संस्थान और कार्यालय खोल कर गई है। अगर इन्हें चालू रखा जाए तो प्रदेश पर 5,000 करोड़ रुपये का खर्च पड़ेगा। प्रदेश को वित्तीय तौर पर मजबूत करने के लिए आय के स्रोत बढ़ाने पड़ेंगे। उपचुनाव में हार के बाद भाजपा ने डीजल पर सात रुपये का वैट कम किया। इससे प्रदेश को भारी नुकसान हुआ। इस कारण ही तीन रुपये बढ़ाने पड़े हैं। 13 जनवरी को कैबिनेट की बैठक में ओपीएस पर विधिवत तौर पर मुहर लगेगी। महिलाओं को 1500 रुपये किस प्रकार और किस-किस वर्ग को देने हैं, इस पर चर्चा करेंगे। 65 हजार पद प्रदेश में रिक्त हैं। इन्हें भरने को लेकर भी चर्चा की जाएगी। मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के साथ पूर्व की भाजपा सरकार ने भेदभाव किया। प्रदेश के कुल बजट का नौ फीसदी जनजातीय क्षेत्रों को मिलना चाहिए था। यह बजट नहीं मिलने से विकास कार्यों को ग्रहण लगा। जनजातीय सलाहकार परिषद का गठन भाजपा सरकार के पहले दो साल में नहीं हुआ। इस कारण सांविधानिक प्रावधान का लाभ नहीं मिल सका। दस गारंटियों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। मंत्री चंद्र कुमार और धनीराम शांडिल ने अपने पुराने अनुभवों के आधार पर प्रदेश का सर्वांगीण विकास करने की बात कही।
वेतन देने को लेना पड़ेगा तीन हजार करोड़ का कर्ज
मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि सरकार का खजाना खाली होने के चलते अभी अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन देने की मुश्किल खड़ी हो गई है। सरकार को जनवरी, फरवरी और मार्च तक हर माह एक-एक हजार करोड़ रुपये कर्मचारियों को देेने के लिए कर्ज लेना पड़ेगा।