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मुफ्त किताबें न देने वाले अफसरों के खिलाफ बड़ा फैसला

Sat, 06 Feb 2016 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हाईकोर्ट ने स्कूली बच्चों को मुफ्त किताबें मुहैया न करवाने के मामले में स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन को आदेश दिए कि वह बोर्ड के उन सभी दोषी अधिकारियों की जिम्मेवारियां तय करें, जिनकी वजह से छात्रों को किताबों से वंचित रहना पड़ा।
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कोर्ट ने चेयरमैन को एक सप्ताह में हलफनामे से यह बताने को कहा है कि बोर्ड ने प्रतिदिन और मासिक तौर पर पब्लिशर्स से कितनी किताबें प्राप्त कीं। इन्हें वितरित करने को कब-कब क्या कदम उठाए। हाईकोर्ट ने मामले में बोर्ड के चेयरमैन को तलब किया था।

शुक्रवार को बोर्ड के चेयरमैन बलबीर टेगटा कोर्ट में हाजिर हुए। न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने चेयरमैन के शपथपत्र का अवलोकन करने के बाद यह आदेश पारित किए। प्रार्थी आत्रेयी सेन ने याचिका में बताया है कि बोर्ड के अधिकारियों और पब्लिशर्स की आपसी मिलीभगत से प्रदेश में स्कूली छात्रों को अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रहना पड़ा।
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प्रार्थी ने मांग की है कि पहली से दसवीं तक बच्चों को मुफ्त किताबें न उपलब्ध करवाए जाने के कारणों का पता लगाने को एसआईटी का गठन किया जाए। आरोप लगाया है कि शिक्षा बोर्ड अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी और आईआरडीपी के छात्रों को मुफ्त किताबें मुहैया करवाने में विफल रहा है।

करोड़ों के घोटाले का आरोप लगाते हुए प्रार्थी ने कोर्ट से मांग की है कि मामले की जांच समयबद्ध ढंग से करवाई जाए। आने वाले सत्र से बच्चों को मुफ्त में किताबें देने के आदेश पारित किए जाएं। कोर्ट ने सरकार और बोर्ड को चार सप्ताह में याचिका का जवाब दायर करने के आदेश भी दिए।
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