हाईकोर्ट ने विधायकों और सांसदों के खिलाफ 10 जिलों में दर्ज 65 अलग-अलग मामलों को लेकर आरोप पत्रों का ब्योरा तलब किया है। अदालत ने इनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने के लिए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (लोक अभियोजक) की ओर से दी राय देने के भी आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ अब इस मामले की सुनवाई 6 दिसंबर को करेगी। सरकार ने विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को खत्म करने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन दायर किया है।
गृह विभाग ने अदालत से 65 अभियोगों को वापस लेने की अनुमति मांगी है। आवेदन में अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत विधायकों के खिलाफ प्रदेश के 10 जिलों की अदालतों में अभियोग चल रहे हैं। दलील दी गई है कि विधायकों पर राजनीतिक द्वेष के कारण ये आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। किसी भी विधायक के खिलाफ गंभीर अपराध की सिफारिश नहीं की गई है। आवेदन से अदालत को बताया है कि यह आवेदन कानून की पुष्टि से असंबद्ध किसी गुप्त उद्देश्य से दायर नहीं किया है। आवेदन सार्वजनिक नीति और न्याय के हित में अच्छे विश्वास से किया गया है, न कि कानून की प्रक्रिया को विफल करने या दबाने के लिए।