हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बीसीसीआई अध्यक्ष एवं सांसद अनुराग ठाकुर, भाजपा के पूर्व मंत्री, विधायक समेत 7 लोगों के खिलाफ धर्मशाला में विजिलेंस थाने के बाहर नारेबाजी मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है।
न्यायाधीश राजीव शर्मा ने अनुराग ठाकुर और एचपीसीए के प्रवक्ता संजय शर्मा की याचिका को स्वीकार करते हुए एफआईआर रद्द करने के साथ-साथ चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट धर्मशाला की ओर से इस मामले में समय-समय पर दिए आदेशों को भी खारिज कर दिया।
कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा कि सीजेएम धर्मशाला की ओर से एसएचओ की अर्जी पर लिया गया संज्ञान मूलतया गलत था। इस कारण इसके बाद के आदेश भी शून्य हो गए।
न्यायाधीश राजीव शर्मा ने फैसले में कहा कि आरोपियों को समन जारी करते समय सीजेएम ने अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीजेएम के समक्ष ऐसे पर्याप्त तथ्य ही नहीं थे जिनके आधार पर वे मामले की जांच के आदेश देते।
यह था मामला, समर्थकों के साथ पहुंचे थे अनुराग
आरोप था कि 24 अक्तूबर 2013 को विजिलेंस थाना धर्मशाला में अनुराग ठाकुर समर्थकों के साथ नारेबाजी करते हुए पहुंचे।
अक्तूबर 2013 में विजिलेंस थाना धर्मशाला में एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को सोसाइटी से कंपनी बनाने के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था। आरोप था कि 24 अक्तूबर 2013 को विजिलेंस थाना धर्मशाला में अनुराग ठाकुर समर्थकों के साथ नारेबाजी करते हुए पहुंचे।
विजिलेंस ने अनुराग को यह कह कर वापस भेज दिया कि उनको पूछताछ के लिए 24 नहीं, बल्कि 31 अक्तूबर को बुलाया गया है। इस दौरान सरकारी काम में बाधा पहुंचाने की शिकायत विजिलेंस ने धर्मशाला थाने में की थी। पुलिस ने पेटी चालान पेश किया।
इसके बाद अनुराग सहित पूर्व मंत्री प्रवीण शर्मा, विधायक वीरेंद्र कंवर, एचपीसीए प्रवक्ता संजय शर्मा, हिमांशु मिश्रा, नरेंद्र अत्री, विश्व ज्योति चक्षु समेत सात लोगों को समन जारी किए गए। अनुराग ठाकुर ने मामले को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी।