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विवादित बैंटनी कैसल का अधिग्रहण करेगी हिमाचल सरकार

Wed, 02 Nov 2016 10:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राजधानी शिमला की विवादित इमारत बैंटनी कैसल के अधिग्रहण की प्रक्रिया सरकार ने शुरू कर दी गई है। अधिग्रहण को लेकर हिमाचल प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (हिप्पा) शिमला ने सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट तैयार की है। पांच नवंबर को इसे लेकर जनसुनवाई रखी गई है, जिसमें लोग अपनी आपत्तियां रख सकेंगे।
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प्रदेश सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में बैंटनी कैसल के अधिग्रहण का फैसला लिया था। बैंटनी कैसल में शहरी संग्रहालय स्थापित करने की योजना है, जबकि आसपास की खाली जमीन में पार्क विकसित करने का प्रस्ताव है।

स्कैंडल प्वाइंट से कालीबाड़ी जाने वाले रास्ते में कोर मालरोड पर स्थित बैंटनी कैसल बिल्डिंग में बनने वाले संग्रहालय में शिल्प कलाकृतियां, मूर्ति कला, मॉडल्स, पांडुलिपियां और शिमला शहर से जुड़े दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे।
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संग्रहालय का संचालन भाषा कला एवं संस्कृति विभाग करेगा। भाषा विभाग ने ही भवन के अधिग्रहण का प्रस्ताव भी रखा है। दावा किया गया है कि संग्रहालय और पार्क बनने से शिमला शहर में कला एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

5 नवंबर को रखी गई है जन सुनवाई : हेमिस
बैंटनी कैसल के अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत सोशल इंपेक्ट असेस्मेंट रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। 5 नवंबर को इसे लेकर जन सुनवाई होगी, जिसमें लोग अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।- हेमिस नेगी, एसडीएम, शिमला शहरी

भाजपा सरकार के समय विवादों में रही इमारत
पूर्व भाजपा सरकार के समय बैंटनी कैसल इमारत खासी विवादों में रही। इस भवन में डीआईजी दक्षिण क्षेत्र का ऑफिस था, जिसे सरकार ने एकाएक खाली करवा दिया। इसके बाद भवन को लंदन के कारोबारी की ओर से 45 करोड़ में खरीदने की चर्चा हुई। बैंटनी कैसल को फाइव स्टार होटल में तब्दील करने को लेकर भी कई दिनों तक चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

1880 में बनी थी बैंटनी कैसल बिल्डिंग
मौजूदा समय में जर्जर हो चुकी बैंटनी कैसल बिल्डिंग 1880 में बनी थी। सिरमौर के महाराज अमर प्रकाश बहादुर ने इस भवन को अपनी स्वामी भक्ति प्रदर्शित करने के लिए अंग्रेजों को दिया। 1880 से पहले यहां कैप्टन ए गोर्डन की एक छोटी सी कॉटेज होती थी, जिसमें सैन्य अफसर रहते थे। भवन का निर्माण ट्यूडर शैली में किया गया। छोटे-छोटे मीनारों पर भवन की ढालदार छत बनाई गई है।

1902 में भवन का बाहरी द्वार बनाया गया। भवन के बाहर लगी रेलिंग में अभी भी महाराजा के राजकीय चिह्न देखे जा सकते हैं। 1957 में इस भवन में राज्य पुलिस मुख्यालय था। काफी समय तक यह इमारत रोजगार कार्यालय के तौर पर भी इस्तेमाल हुई। बीते साल इस भवन में बॉलीवुड फिल्म की शूटिंग भी हुई। 1968, 1975 और 2004 में भी इस भवन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
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