अगले बजट के लिए अधिकारियों ने अगर अधूरी जानकारी भेजी तो वे नप सकते हैं। सरकार के वित्त विभाग ने दोटूक कहा है कि आधी-अधूरी जानकारी भेजना वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। वित्त विभाग ने तमाम महकमों से एक अक्तूबर से पहले निर्धारित प्रारूप पर बजट प्रस्ताव मांगे हैं।
जयराम सरकार वित्त वर्ष 2019-20 के अपने नए बजट अनुमानों को तैयार करने में अभी से जुट गई है। ये अनुमान मार्च 2019 में सरकार के दूसरे बजट सत्र में पेश किए जाने हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त अनिल खाची ने तमाम प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को पत्र भेजे हैं। पत्र में लिखा गया है कि बजट अनुमान तैयार करने के लिए प्रस्ताव सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद हर साल एक अक्तूबर तक वित्त विभाग को भेजने अनिवार्य होते हैं।
निर्धारित समयसारिणी के अनुसार बजट प्रस्तावाें को वित्त विभाग तक नहीं पहुंचाए जाने से आय और व्यय अनुमानों को वित्त विभाग की ओर से अपने स्तर पर तैयार करने का कोई विकल्प नहीं रह जाता है। बाद में इनमें किसी भी तरह का परिवर्तन करना संभव नहीं होता है।
पत्र में लिखा है कि गत वर्षों में यह देखा गया है कि कुछ विभाग निर्देशों को ध्यान में न रखते हुए आधी-अधूरी सूचनाएं ही वित्त विभाग को भेजे देते हैं। ये वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। ऐसे में सभी प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ और संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी करें।
सुनिश्चित करें कि वर्ष 2019-20 में भेजे जाने वाले सभी बजट प्रस्तावों यानी बजट अनुमानों और संशोधित बजट अनुमानों के प्रस्ताव सभी औपचारिकताओं को पूर्ण करके वित्त विभाग को उपलब्ध करवाएं।