मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में संस्कृत की पाठशालाएं खुलेंगी। निजी तौर पर हिमाचल में चल रही संस्कृत पाठशालाओं को भी सरकार अपने अधीन करेगी। हर जिले में संस्कृत कॉलेज खोलने के प्रयास होंगे। प्राचीन संस्कृत भाषा की पत्रिकाओं को सरकार विशेष आर्थिक मदद देगी।
वह संस्कृत महाविद्यालय सोलन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के शुभारंभ पर बोल रहे थे। कहा कि संस्कृत से ही हमारी संस्कृति है। बिना संस्कृत के हमारी संस्कृति जीवित नहीं रह सकती। अंग्रेज बाइबल अंग्रेजी में पढ़ते हैं। कुरान फारसी या अरबी में पढ़ी जाती है, लेकिन हमारे वेद, उपनिषद और धार्मिक ग्रंथ संस्कृत में नहीं पढे़ जाते।
संस्कृत आम भाषा नहीं रह गई है। इसे आम भाषा बनाना जरूरी है। हर हिंदू को संस्कृत का इतना बोध होना चाहिए कि हिंदुओं के पौराणिक ग्रंथ संस्कृत में पढ़े और समझे जा सकें। अधिकांश बोलियां संस्कृत और हिंदी से जुड़ी हैं। प्रदेश देव भूमि कहलाती है। यहां संस्कृत का पठन पाठ्य रहा है। संस्कृत पत्रिकाएं भी प्रकाशित होती हैं। इन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है।