फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब तर्ज पर वेतन/भत्ते नहीं देगी वीरभद्र सरकार

विज्ञापन
विज्ञापन
हिमाचल सरकार पंजाब पैटर्न पर कर्मचारियों को वेतन-भत्ते देने के मूड में नहीं है। वित्त विभाग ने प्रदेश हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए आदेश की प्रति सभी प्रशासनिक सचिवों, सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्त और सभी उपायुक्तों को जारी करके इसके संकेत दे दिए हैं। प्रदेश में अभी तक पंजाब तर्ज पर ही राज्य के कर्मचारियों को वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान किया जाता रहा है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने बलबिंदर सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में सुनवाई करते हुए 16 अक्तूबर 2014 को यह फैसला दिया था कि राज्य सरकार प्रदेश के कर्मचारियों को पंजाब तर्ज पर वेतन या अन्य भत्ते देने के लिए बाध्य नहीं है। हिमाचल की अपनी अलग पहचान और नियम हैं।

ऐसे में पंजाब को फॉलो करना जरूरी नहीं है। उसी फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के आदेश की प्रति को वित्त विभाग की ओर से जारी किया गया है। ऐसी स्थिति में भविष्य में अब प्रदेश सरकार को हिमाचल के लिए अपना वेतन आयोग बनाना जरूरी हो जाएगा। हालांकि, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पूर्व में कई बार कह चुके हैं कि सरकार अब अपना वेतन आयोग बनाएगी।
विज्ञापन

पढ़ें, विधायकों के वेतन भत्ते पर क्या बोले सीएम?

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से विपक्ष के विधायकों पर की गई टिप्पणी कि वे अपने काम के प्रति गंभीर नहीं, विधायकों को भत्ते लेने के हकदार नहीं, को लेकर वीरवार को सदन में जोरदार हंगामा हुआ। भाजपा विधायक मंगलवार की विधानसभा कार्यवाही की प्रोसीडिंग लेकर सदन में पहुंचे।

विपक्षी विधायकों का कहना था कि ये बात सीएम ने सदन में कही थी। उन्होंने कहा - हम यहां भत्ता लेने नहीं आते। हम अपना काम करते हैं। वॉकआउट करना हमारा जनतांत्रिक अधिकार है। करीब 10 मिनट चली बहस के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा अगर यह प्रोसीडिंग में है तो मैं ये शब्द वापस लेता हूं। बाद में यह शब्द प्रोसीडिंग से हटा लिए गए।

शिमला के विधायक सुरेश भारद्वाज ने मंगलवार को हुई विधानसभा की कार्यवाही की प्रोसीडिंग सदन में पढ़ी। सदन में भाजपा विधायकों के वॉकआउट के बाद मुख्यमंत्री ने जो शब्द कहे थे, सुरेश भारद्वाज ने उस पेरा को पढ़कर सुनाया।

वीरभद्र को जारी नोटिस स्थगित

वहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके परिवार के सदस्यों से संबंधित इनकम टैक्स के मामलों की जांच का केन्द्रीयकरण करने के बारे इनकम टैक्स कमिश्नर शिमला की ओर से जारी नोटिस को हाईकोर्ट ने स्थगित कर दिया है।

अदालत ने अपने आदेशों में कहा कि इनकम टैक्स विभाग की ओर से जारी नोटिस इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 127 (2) के प्रावधानों के तहत नहीं है। अंतरिम आदेश पारित करते हुए न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने कहा कि प्रार्थी वीरभद्र सिंह और उनके परिवार के सदस्यों से संबंधित इनकम टैक्स के मामलों की जांच के दौरान पाए गए तथ्यों को विभाग की ओर से उन्हें दिया जाना जरूरी था, जिससे प्रार्थी सही ढंग से अपने केस की पैरवी कर सकते।
विज्ञापन

छोटी सड़कों को जोड़ने को बजट देगा बोर्ड

हिमाचल प्रदेश कृषि उत्पाद विपणन बोर्ड गांवों में छोटी-छोटी सड़कें जोड़ने और रोप-वे बनाने के लिए धन देगा। ये छोटी सड़कें एक किलोमीटर, आधा किलोमीटर या कुछ यार्ड तक बनाई जाती हैं। इन्हें बनाना कोई बुरी बात नहीं है। सड़क बनाने को लोक निर्माण विभाग को कई तरह की अनुमतियां लेनी होती हैं। ऐसे में वक्त बहुत लग जाता है।

कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए ही ऐसा किया जाता है। विचार-विमर्श करने के बाद ही यह फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह जानकारी बैजनाथ के कांग्रेस विधायक किशोरी लाल के सवाल के जवाब में दी। बहस के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने कहा पिछले हफ्ते भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने मुख्यमंत्री पर कुछ टिप्पणी की थी।

वह गुड टेस्ट में नहीं थी। रवि ने खुद कहा मैंने गलती से कह दिया। विदड्रा करता हूं। उन्होंने रवि से पूछा - क्या कहा था आपने। इस पर रवि ने कहा-आपको मालूम है कि हम कांगड़ा में कहते हैं ज्यादा ××××× अच्छी नहीं। हमने वही कहा था और उसको बाद में विदड्रा कर लिया था लिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें