प्रदेश सरकार ने वन भूमि पर सेब बगीचे बनाने वाले किसानों को राहत देने की कवायद शुरू कर दी है। अवैध कब्जों को लेकर गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने फैसला लिया है कि दस बीघा से कम भूमि वाले छोटे और मझले किसानों को राहत देने के संबंध में विधिक विकल्प तलाशे जाएंगे।
बुधवार को राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। तय हुआ कि अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण श्रीधर इस संबंध में विधिक विकल्प तलाशने के साथ समिति को सुझाव भी देंगे। यह भी निर्णय लिया कि यदि आवश्यक हुआ तो प्रदेश के किसानों के लिए अनुकूल अधिनियम लाने की संभावनाओं को भी तलाशा जाएगा।
इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। समिति ने निर्णय लिया कि उच्च न्यायालय के समक्ष मानवता के आधार पर समीक्षा याचिका दाखिल करने की संभावना को भी देखा जाएगा। समिति ने आयुर्वेद मंत्री, प्रधान सचिव वन तथा मुख्य अरण्यपाल वन को उच्च स्तरीय कमेटी के लिए अतिरिक्त सदस्य के रूप में मनोनीत भी किया।
अब इस तारीख को होगी अगली बैठक
समिति की अगली बैठक 12 जनवरी को निर्धारित की गई है। बुधवार को हुई बैठक में वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, मुख्य संसदीय सचिव रोहित ठाकुर, रोहड़ू के विधायक मोहनलाल ब्राक्टा, प्रधान सचिव वन तरुण कपूर, प्रधान सचिव विधि डॉ. बलदेव सिंह ठाकुर, विशेष सचिव राजस्व डीके रतन, पीसीसीएफ एसएस नेगी, वन विकास निगम के एमडी सीएस सिंह उपस्थित थे।
समिति की बैठक से पहले मंगलवार को हाईकोर्ट ने सरकार को 28 फरवरी, 2017 तक वन भूमि से अवैध कब्जे हटाकर कोर्ट को सूचित करने को कहा है। सरकार ने इसके लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व और पीसीसीएफ को निजी रूप से मौजूद रहने के निर्देश जारी किए थे।