कसौली फ ायरिंग में सरकारी सेवा देेते हुए जान गंवाने वाली सहायक टाउन प्लानर शैल बाला शर्मा को हिमाचल गौरव पुरस्कार मिलेगा। सरकार के एक प्रवक्ता ने देर रात को बताया कि यह फैसला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया है। यह भी फै सला लिया गया कि शैल बाला के परिवारवालों को उनके बचे सेवाकाल की पूरी तनख्वाह दी जाएगी।
पांच लाख की वित्तीय सहायता की भी घोषणा राज्य सरकार पहले ही कर चुकी है। सरकार ने तय किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हर तरह से लागू किया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को पूरी तरह से सुरक्षा मुहैया की जाएगी।
पिछले कुछ दिनों में प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। पंद्रह दिन में सूबे में हत्या, हत्या के प्रयास, दुराचार व दुराचार के प्रयास जैसे दर्जन भर मामले सामने आए हैं। लेकिन पुलिस बिगड़ती कानून व्यवस्था को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। हालत यह है कि आला अधिकारी तबादलों में व्यस्त हैं और जिलों के अफसर अपने पद के प्रोटोकॉल से ही बाहर नहीं निकल पा रहे। नतीजतन निचले अधिकारी कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं।
एक मई को दिनदहाड़े एक महिला अधिकारी पर ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई। पुलिस की मौजूदगी में हुई इस घटना के बाद आरोपी मौके से फरार तक हो गया लेकिन पुलिस को उसे पकड़ने में तीन दिन लग गए। पुलिस की मौजूदगी में हुई सनसनीखेज वारदात के बावजूद शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस के आला अधिकारी अपने अधीनस्थों को बचाने में जुटे रहे। पुलिस के कर्मचारियों के अवैध निर्माण तोड़ने की कार्रवाई के दौरान निहत्थे पहुंचने की पुष्टि हो गई थी।
लेकिन शासन के अधिकारी भी पुलिस के अधिकारियों कर्मचारियाें पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। पुलिस और शासन की निष्क्रियता के चलते सरकार को खासी किरकिरी झेलनी पड़ी। कांग्रेस ने न सिर्फ जनता के सामने सरकार और पुलिस की नाकामी को प्रदर्शन के जरिये पहुंचाया। बल्कि वीरवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की। पुलिस की नाकामी और कांग्रेस के उग्र तेवर से सरकार बैकफुट पर आ गई। यही कारण रहा कि शासन की नाकामी के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को खुद कमान अपने हाथ संभालनी पड़ी।
नई सरकार के बनने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला, कांगड़ा और मंडी के अलावा सिर्फ डीजीपी पद पर बदलाव किए थे। बाकी अफसरों को पिछली सरकार के दौरान मिली तैनाती के बाद भी काम करने का मौका दिया था। तीन महीने के बाद भी आला अधिकारी परिणाम देने में असफल साबित हो रहे हैं।
यही कारण है कि अब प्रदेश पुलिस में बड़े बदलाव की आशंका जताई जा रही है। कसौली कांड से पुलिस की नाकामी के सामने आने के बाद सरकार और कड़े फैसले लेने की तैयारी में है। एसपी के बाद अब ऊपर के अधिकारियों पर भी गाज गिरने की संभावना है।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश की लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था के अलावा सरकार की अनसुनी भी बदलाव का कारण हो सकती है। इसके अलावा जिलों में भी बदलाव होने की आशंका जताई जा रही है।