सरकार ने सुप्रीमकोर्ट की ओर से एचपीसीए के खिलाफ रद्द एक मामले में स्थिति साफ की है। सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह विजिलेंस मामला नहीं था। एचपीसीए के खिलाफ विजिलेंस में दर्ज मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
इसे हिमाचल हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट में दो अन्य मामले भी लंबित हैं। सर्वोच्च न्यायालय से रद्द मामले को कांगड़ा जिला पुलिस देख रही थी। यह सरकारी भूमि अधिग्रहण से संबंधित था। इसमें अनुराग ठाकुर के व्यक्तिगत संलिप्त होने का सबूत न मिलने पर सुप्रीमकोर्ट ने मामला रद्द कर दिया।
कहा कि सरकार इस संदर्भ में आवश्यक कदम उठाएगी। गंभीर आरोपों के अन्य लंबित विजिलेंस मामलों को इस मामले से उलझाया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने एचपीसीए की विजिलेंस मामले को खारिज करने की अपील रद्द कर दी थी।
मामले में एचपीसीए ने सुप्रीमकोर्ट में अपील की थी। मामले की सुनवाई 29 मार्च हो होगी। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर भ्रम फैलाने वाले नेताओं पर निशाना साधा। प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर, 20 सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वय समिति के अध्यक्ष रामलाल ठाकुर ने भाजपा नेताओं ने कहा कि वे न्यायालय में लंबित गंभीर विजिलेंस मामलों को इस एक मामले से उलझाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के कुछ भाजपा नेता इस निर्णय से उत्साहित हैं। इनमें कांगड़ा पुलिस जांच कर रही थी। विजिलेंस द्वारा भूमि कानूनों के उल्लंघन कर धर्मशाला के समीप भूमि खरीदने से संबंधित दर्ज गंभीर मामला अभी भी लंबित है। कहा कि तथाकथित नेता एक छोटी लड़ाई जीतने का दावा कर रहे हैं, जबकि युद्ध अभी भी बाकी है।