इसके बावजूद विभाग में चर्चा है कि इन डिस्पेंसरियों में हो रहे जरूरत से ज्यादा के खर्च और अधिकांश लोगों का लाभ नहीं मिलने से राज्य सरकार चिंतित है। ये भी माना जा रहा है कि इन डिस्पेंसरियों में ओपीडी की संख्या बढ़ाने के लिए आगामी कार्ययोजना भी तैयार की जा सकती है।
कम ओपीडी वाली डिस्पेंसरियों में अगर स्टाफ ज्यादा हो तो इसका भी युक्तिकरण किया जा सकता है। राज्य आयुर्वेद विभाग की संयुक्त निदेशक भावना ने इसकी पुष्टि की है कि सभी आयुर्वेद डिस्पेंसरियों से ओपीडी में मरीजों की संख्या का ब्योरा मांगा गया है। ये ब्योरा सरकार की ओर से मांगा गया है। क्यों मांगा गया है? निदेशालय स्तर पर इसकी कोई जानकारी नहीं है।