सरकार ने एएसपी गौरव सिंह को बद्दी से धर्मशाला स्थानांतरित करने के पीछे का कारण स्पष्ट करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि उन्हें बड़ी जिम्मेवारी देते हुए बद्दी से धर्मशाला भेजा गया। कहा कि बद्दी की अपेक्षा कांगड़ा में कानून व्यवस्था काफी चुनौतीपूर्ण है।
एएसपी गौरव सिंह को बड़ा रैंक और बड़ी जिम्मेवारी दी गई है। गृह विभाग के विशेष सचिव सीपी वर्मा ने शपथपत्र से स्टेटस रिपोर्ट दायर करते हुए तत्कालीन डीसी ऊना यूनुस को ट्रांसफर करने के निर्णय संबंधी बोर्ड के निर्णय और कंपिटेंट अथॉरिटी यानी मुख्यमंत्री के अप्रूवल के दस्तावेज तो लगाए।
लेकिन एएसपी गौरव सिंह के तबादला संबंधी कोई दस्तावेज पेश नहीं किए। स्टेटस रिपोर्ट में बताया है कि एक अगस्त को एएसपी गौरव सिंह ने रात के समय कुलदीप कौर के टिपर को ओवरलोडिंग के आरोप में पकड़ा था। बाद में एएसपी गौरव सिंह ने 40000 रुपये में कंपाउंड कर लिया था। मामले पर अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
हाईकोर्ट ने खुद लिया था संज्ञान, सरकार से मांगा था जवाब
हिमाचल हाईकोर्ट
राज्य में सक्रिय खनन माफिया पर शिकंजा कसने में नाकाम सरकार के उस रवैये पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। मामले में कोर्ट ने सरकार से वो कारण पूछे थे, जिनके तहत खनन माफिया पर कार्रवाई करने वाले एएसपी बद्दी गौरव सिंह और डीसी ऊना को तबादले का सामना करना पड़ा।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने एएसपी बद्दी और डीसी ऊना को स्थानांतरित करने के पीछे के कारणों की जानकारी मांगी थी। कोर्ट ने खनन माफियाओं की बढ़ती सक्रियता पर संज्ञान लेते हुए सरकार से पूछा था कि उसने उन अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की, जिनके संरक्षण में खनन माफिया अपना अवैध कारोबार जारी रखे है।
हाईकोर्ट ने डीसी ऊना और एएसपी गौरव सिंह के तबादला आदेशों से जुड़ा तमाम रिकॉर्ड कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश भी दिए थे। कोर्ट ने उस मामले की भी संपूर्ण जानकारी मांगी थी। इसके तहत कथित तौर पर एमएलए के रिश्तेदार के टिपर का चालान किया गया था।
केएनएच में बच्चा बदलने पर सरकार को नोटिस
हाईकोर्ट ने कमला नेहरू अस्पताल शिमला में बड़ी लापरवाही के चलते बच्चा बदलने के मामले में स्वास्थ्य सचिव सहित अस्पताल प्रशासन, गृह सचिव, एसपी शिमला और डीजीपी को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने बच्चे के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए। प्रार्थियों ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है। प्रार्थियों के अनुसार 26 मई को कमला नेहरू अस्पताल में शीतल ने एक बच्चे को जन्म दिया।
मौके पर मौजूद नर्सों ने उसे कहा कि उसे बेटा हुआ है, लेकिन उसे बाद में किसी और की बेटी थमा दी गई। दोनों प्रार्थियों ने अपने स्तर पर छानबीन की, जिसमें उन्हें कुछ लोगों द्वारा बताया गया कि कमला नेहरू अस्पताल में बच्चों की अदला बदली वाला गिरोह सक्रिय है।
इसके बाद उन्होंने खुद ही उन्हें सौंपी गई बच्ची का डीएनए टेस्ट करवाया। डीएनए में वह बच्ची उनकी नहीं पाई गई। प्रार्थियों का आरोप है कि पुलिस को सबूतों के साथ शिकायत देने के बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। मामले पर सुनवाई 14 सितंबर को होगी।