हिमाचल सरकार ने बिजली बोर्ड प्रबंधन से इलेक्ट्रॉनिक मीटर खरीद मामले में रिपोर्ट तलब की है। राज्य सरकार ने यह रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर भेजने के आदेश जारी किए हैं। यह मामला बिना जरूरत के ही बिजली के 16 हजार मीटरों की खरीद से संबंधित है।
यह खरीद शिमला, सोलन और नाहन सर्किलों में की गई। इस मामले को ‘अमर उजाला’ ने 20 जनवरी के अंक में प्रमुखता से छापा है। इसके बाद सरकार एकाएक हरकत में आई है। प्रधान सचिव (ऊर्जा) एसकेबीएस नेगी ने रिपोर्ट तलब करने की पुष्टि की है।
‘अमर उजाला’ ने खबर छापी थी कि 1800 करोड़ के घाटे में चलने वाले हिमाचल बिजली बोर्ड में करोड़ों का गड़बड़झाला सामने आया है। बिना जरूरत ढाई साल पहले पांच करोड़ रुपये से अधिक के 16 हजार इलेक्ट्रॉनिक मीटर खरीद लिए। इनका आज तक इस्तेमाल नहीं किया गया।
ये इलेक्ट्रॉनिक मीटर बोर्ड के मीटर टेस्टिंग स्टोरों में पड़े-पड़े खराब हो गए हैं। वारंटी पीरियड भी खत्म हो चुका है। मिले दस्तावेजों के अनुसार बोर्ड के जुलाई 2012 से लेकर मार्च 2013 तक तत्कालीन मुख्य अभियंता (एमएम) के स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की खरीदारी की गई।
यह दर्शाया गया कि शिमला, सोलन और नाहन सर्किल में इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की जरूरत है। नवंबर 2014 में इनका गारंटी एवं वारंटी पीरियड भी खत्म हो चुका है। ये आठ हजार मीटर 2.65 करोड़ रुपये में खरीदे गए थे। तकरीबन इतने ही मीटर प्रदेश में फील्ड स्तर पर बर्बाद हो रहे हैं, जिनकी कीमत ढाई करोड़ से अधिक है।