हिमाचल के सोलन जिले का तुंदल और मंडी जिले का संधोल गांव अगर पूरी तरह से कैशलेस नहीं हैं तो दोनों गांवों को कैशलेस किया जाएगा। राज्य सरकार के आईटी विभाग ने इन गांवों के कैशलेस होने का दावा कर रही संस्था को निर्देश जारी किए हैं कि वे इस मामले को गंभीरता से लें।
दोनों गांवों को सचमुच कैशलेस करवाए। संस्था ने कैशलेस होने के दावे पर इस संस्था से रिपोर्ट भी तलब की है और पूछा है कि बताएं कि किस आधार पर ऐसा कहा गया। केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की बैठक में सोमवार को भारत सरकार से जुड़ी संस्था सीएससी-एसपीवी ने हिमाचल के सोलन जिले का तुंदल और मंडी जिले के संधोल गांवों के कैशलेस होने का दावा किया था।
लेकिन हिमाचल के इन दो कथित कैशलेस गांवों की जमीन पर पोल खुल गई। इन गांवों के कई लोग जानते तक नहीं कि कैशलेस क्या बला है। यहां दुकानों पर न स्वाइप मशीनें दिखीं, न डेबिट या क्रेडिट कार्ड। कारोबार कैश पर चलता नजर आया है। सीएससी-एसपीवी ने ये गांव कैशलेस बताकर इन्हें केंद्र सरकार से सम्मानित करवाने तक की बात की थी।
हिमाचल सरकार के आईटी विभाग की निदेशक मानसी सहाय ठाकुर ने कहा है कि संस्था से ब्योरा तलब किया गया है। अगर ये गांव कैशलेस नहीं भी हैं तो भी इस संस्था को इन्हें कैशलेस बनाने को कहा गया है। संस्था को कहा गया है कि वह अपने दावे की फिर से जांच कर ले।
इसे विभाग की जांचेगा। संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा है कि अगर 75 फीसदी लोग भी कै शलेस गतिविधियों को अपनाते हैं तो भी गांवों को कैशलेस घोषित किया जा सकता है। उन्हें इसके नोर्म्स स्पष्ट करने को कहा गया है। अगर भविष्य में भी नोर्म्स बदल जाते हैं तो भी उस हिसाब से बताए गए गांवों को कैशलैस करवाने को कहा गया है।