प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत का एक सपना देखा था। उसी सपने को पूरा करने के लिए केंद्र ने अगले पांच साल में हिमाचल को पूरी तरह स्वच्छ बनाने के लिए 852 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया।
चालू वित्तीय वर्ष में खर्च करने के लिए दो अक्तूबर को अभियान शुरू होने से पहले ही 48 करोड़ रुपये का बजट भी थमा दिया, लेकिन एक माह बाद भी हिमाचल को स्वच्छ करने के लिए बनाई गई योजना लागू नहीं की जा रही है।
इसे एक माह से कागजों में दबा दिया गया। केंद्र की ओर से जारी बजट पर प्रदेश सरकार के अफसर कुंडली मारकर बैठे है। ऐसे में सवाल यह है कि कैसे अच्छे दिन आएंगे।
कहां गए भाजपाई?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफाई अभियान को सफल बनाने में प्रदेश के भाजपाई भी एक्टिव नहीं हैं। प्रदेश में उनकी ओर से भी स्वच्छता अभियान को लेकर कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया जा रहा है, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है। उनकी ओर से भी केवल बयानबाजी की जाती है।
अफसरों ने केवल फोटो सेशन किया
गांधी जयंती पर महज दिखावे और फोटो खिंचवाने के लिए अफसर से लेकर नेता तक शिमला के रिज मैदान पर हाथ में झाड़ू लेते दिखे थे। उसके बाद से स्वच्छता अभियान के लिए किसी स्तर पर न तो तत्परता नहीं दिखाई गई और न ही गंभरता नजर आई।
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों में आज भी एक अक्तूबर वाली स्थिति बनी हुई है। इसको लेकर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो रहा है।
इनकी ये सफाई
'निश्चित तौर पर केंद्र से 48 करोड़ रुपये का बजट प्रदेश को मिल चुका है। इस बजट को संबंधित विभागों को आवंटित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।' - अनिल शर्मा, ग्रामीण विकास मंत्री, हिमाचल प्रदेश
'बजट तो सरकार को आया है। इसलिए सरकारी एजेंसियों को सफाई अभियान में तेजी दिखानी चाहिए। भाजपा कई सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राज्य के विभिन्न इलाकों में सफाई अभियान में हिस्सा ले रही है।' - गणेश दत्त, प्रवक्ता भाजपा हिमाचल