भारी बारिश से प्रदेश में काफी नुकसान हुआ है। 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। लोगों के घर बह गए हैं। पशु बह गए है। सड़कें टूट गईं। राज्य के तमाम क्षेत्रों में जीवन अस्तव्यस्त हो गया है। इतना सब होने के बावजूद प्रदेश सरकार सुस्त नजर आ रही है, जबकि विपक्ष के नेता फील्ड में उतर गए हैं।
जहां तीन दिन तक मुख्यमंत्री सहित कई मंत्रियों ने दिल्ली में डेरा जमाए रखा, वहीं भाजपा नेताओं को फील्ड में उतरने का निर्देश दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस के बाद ही मुख्यमंत्री दिल्ली रवाना हो गए थे। मुख्यमंत्री के पीछे कई मंत्री भी दिल्ली रवाना हो गए।
जबकि, प्रदेश आपदा की पीड़ा से कराह रहा था। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने 16 अगस्त को धर्मशाला में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। आपदा से कितना नुकसान हुआ, सरकार की ओर से यह बताने के लिए कोई तैयार नहीं था।
जबकि, भाजपा नेता अपने-अपने क्षेत्रों में न केवल लगातार दौरे कर रहे हैं, बल्कि आपदा की आड़ में सरकार पर वार करने से भी नहीं चूक रहे हैं। प्रदेश की तसवीर यह है कि जिलों में आपदा प्रबंधन जिलों के डीसी के भरोसे छोड़ दिया गया है। प्रदेश स्तर पर मॉनीटरिंग करने की व्यवस्था नहीं है।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह राणा ने कहा कि आपदा पर सरकार पूरी तरह गंभीर है। मैं व्यक्तिगत तौर पर पूरे प्रदेश में घूमकर प्रशासन को एक्टिव कर रहा हूं, जिससे किसी भी व्यक्ति को कोई परेशानी न होने पाए। यह कहना गलत है कि मुख्यमंत्री और मंत्री दिल्ली में है, जिससे काम नहीं हो रहा।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं विधायक डा.राजीव बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह सहित तमाम मंत्री प्रदेश सरकार को बचाने के लिए दिल्ली में डेरा जमाए हुए है। प्रदेश में किस तरह की आपदा या विपदा आई है, इससे सरकार के मंत्रियों को कोई सरोकार नहीं है।