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मंत्रियों के निशाने पर आए नड्डा, कहा-जनता को गुमराह कर रहे हैं

Wed, 02 Nov 2016 09:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मांगे गए इस्तीफे पर सरकार के मंत्री भड़क गए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर, उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने जेपी नड्डा के बयान की कड़ी आलोचना की है।
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उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं। नड्डा का बयान तथ्यविहीन, गुमराह करने वाला तथा राजनीति से प्रेरित है। मंत्रियों ने कहा कि प्रदेश भाजपा में प्रधानता को लेकर अंतर्कलह चल रही है। जेपी नड्डा की राज्य राजनीति पर नजर है। वह राज्य की राजनीति में बने रहने के लिए इस प्रकार की गुमराह करने वाली बयानबाजी कर रहे हैं।

61 एनएच देने का दावा राजनीतिक घोषणा
मंत्रियों ने कहा कि केंद्र द्वारा राज्य के लिए 61 नई राष्ट्रीय उच्च मार्ग परियोजनाएं देने का भाजपा का दावा मात्र राजनीतिक घोषणा है। अभी तक राज्य सरकार को केंद्र से इन परियोजनाओं के लिए एक भी पैसा प्राप्त नहीं हुआ है। इन परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करने के लिए राज्य सरकार का 170 करोड़ रुपये की राशि का प्राक्कलन भी केन्द्र ने अभी तक स्वीकृत नहीं किया है।
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मंत्रियों ने गिनाए यूपीए सरकार के समय मिले तोहफे

सरकार के मंत्रियों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में राज्य की सहायता करने के बजाए जेपी नड्डा अनावश्यक हो हल्ला कर रहे हैं। हमीरपुर, चंबा और सिरमौर में तीन नए मेडिकल कालेज केंद्र में तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा प्रत्येक को 190 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान सहित स्वीकृत किए गए थे। उन्होंने केंद्र सरकार से इन तीनों कालेजों की कुल 570 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि को एकमुश्त जारी करने को कहा है।

12 सूत्रीय ज्ञापन में सहयोग करें जेपी नड्डा
मंत्रियों ने कहा कि राज्य सरकार पर दोषारोपण करने के बजाय जेपी नड्डा को राज्य के लिए इसका वाजिब हिस्सा दिलवाने में सहायता करनी चाहिए। सरकार ने राज्य की विभिन्न मांगों से संबंधित 12 सूत्रीय ज्ञापन केंद्र को सौंपा है।

वीरभद्र की अगुवाई में दोबारा बनाएंगे सरकार
मंत्रियों ने कहा कि कांग्रेस पार्टी राज्य में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में आगामी चुनावों में भी विजय प्राप्त करेगी और दोबारा सरकार बनाएगी। उनके त्यागपत्र का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता है। आयकर रिटर्न के एकमात्र मामले में वीरभद्र सिंह को परेशान एवं अपमानित करने के लिए भाजपा के इशारे पर केंद्र की तीन प्रमुख एजेंसियां जांच कर रही है। मामला विचाराधीन है तथा विभिन्न आयकर अपीलीय प्राधिकरण एवं न्यायालयों में लंबित है।
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