हालांकि, कई राज्यों में विजिलेंस ब्यूरो को पूरी तरह आरटीआई के दायरे से बाहर करने पर विवाद रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ा विभाग होता है। आरटीआई एक्ट 2005 के तहत आवेदन पर 30 दिन में सूचना देना अनिवार्य है। यदि अधिकारी तय समय में सूचना नहीं देते या गलत जानकारी देते हैं, तो उन पर 250 रुपये प्रतिदिन (अधिकतम 25,000 रुपये) का जुर्माना लगाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
तमिलनाडु, यूपी और हरियाणा में भी जांच एजेंसियां दायरे से बाहर पड़ोसी राज्य हरियाणा, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में भी खुफिया या विशेष जांच एजेंसियों को आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया है। एजेंसियों को आरटीआई से बाहर रखने के पीछे तर्क दिया जाता है कि जांच में कोई आरोपी आरटीआई से विभाग की केस फाइल या नोटिंग तक पहुंच बना ले तो सबूतों को मिटा सकता है और जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।