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मंत्रियों-चेयरमैनों और अफसरों के घरों पर फूंक दिए 5.17 करोड़, कर्मचारी बेहाल

Fri, 17 Mar 2017 10:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल सरकार ने पिछले तीन सालों में मंत्रियों, निगम-बोर्डों के चेयरमैनों और अफसरों की कोठियों की मरम्मत पर ही  5.17 करोड़ रुपये खर्च कर डाले। कर्मचारियों के आवासों के निर्माण के लिए मात्र 4.13 करोड़ रुपये ही जारी हुए। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने यह उठाया। 
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मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रदेश सरकार ने एक जनवरी 2013 से 15 फरवरी 2015 के बीच शिमला में मंत्रियों के आवासों की मरम्मत पर 132.93 लाख, चेयरमैनों-वाइस चेयरमैनों के आवासों पर 38.89 लाख और अधिकारियों के मकानों पर 345.52 लाख रुपये खर्च किए हैं।

तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए शिमला के नाभा में 206.91 लाख खर्च कर ब्लॉक-डी और ब्लॉक-क्यू के 16 सेट का निर्माण किया जा रहा है। सुरेश भारद्वाज ने सवाल किया था कि मंत्रियों, चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के आवासों की मरम्मत पर इतनी भारी भरकम राशि खर्च की गई है, जबकि सरकारी कर्मचारियों के आवास जर्जर हालत में हैं। बारिश और तूफान में उनके सरकारी आवासों की छतें तक उड़ गईं।
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इनकी मरम्मत तक नहीं हो रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब में कहा कि सरकारों के बदलने पर मंत्रियों, अधिकारियों और चेयरमैनों के आवासों की पूरी तरह से मरम्मत होती है, मकान बड़े होते हैं, उनमें रंग-रोगन होता है तो खर्च बढ़ जाता है। सरकार सरकारी कर्मचारियों के आवासों की मरम्मत को भी प्राथमिकता से लेती है, जिसके लिए बजट मुहैया करवाया गया है।

कर्मचारियों की संख्या ज्यादा तो कोठियों पर इतना खर्च क्यों : धूमल
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल ने सदन में इस सवाल के पक्ष में कहा कि मंत्री आंकड़ों में उलझाने का प्रयास कर रहे हैं। मंत्री बताएं कि कितने मंत्री, चेयरमैन और अधिकारी हैं और कितने कर्मचारी हैं। इनकी संख्या में अंतर है तो मंत्रियों की कोठियों पर अधिक बजट क्यों खर्च किया जा रहा, जबकि कर्मचारियों और उनके आवासों की संख्या कहीं अधिक है। 

दूसरी राजधानी बनाकर शिमला पर हो रहा अत्याचार

भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि अंग्रेजों के वक्त हिंदुस्तान, पाकिस्तान, म्यांमार और सिलोन तक को शिमला से देखा जाता था। ये उस वक्त राजधानी थी। आजादी के बाद हिमाचल अलग राज्य बना तो शिमला ही राजधानी बनाई गई। पिछले दिनों शिमला को दूसरी राजधानी बनाने की घोषणा कर दी गई है। भारद्वाज बोले - आप शिमला से अत्याचार कर रहे हैं। एक मंत्री से प्रेम के कारण स्मार्ट सिटी बनाने को धर्मशाला को कई अंक दिए गए।

शिमला के साथ अन्याय हुआ। भारद्वाज वीरवार को बजट पर चर्चा के दौरान सदन में संबोधित कर रहे थे। कहा कि मेडिकल यूनिवर्सिटी भी मंडी को दी गई। शिमला में इतना बड़ा अस्पताल है। उसे भी बर्बाद करने में जुटे हैं। सुपर स्पेशिएलिटी को भी मल्याणा शिफ्ट किया जा रहा है। धर्मशाला में अलग से विधानसभा खोली है। ये हमारे लिए ठीक है कि हम वहां पिकनिक में जाते हैं। वहां इन सबकी नहीं, विकास की जरूरत है।

कहा कि शिमला में जब बर्फ गिरती है तो सीएम कांगड़ा दौरे पर चले जाते हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट के अध्यक्ष जालंधर से नोटबंदी पर बयान देते हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों के माध्यम से बैकडोर एंट्री करवाई जा रही है। उन्होंने इसकी जांच करने को कहा कि कंपनियां किसकी हैं।  

दूसरी राजधानी के मंत्रिमंडल के फैसले का मंत्रियों को भी पता न था 
भारद्वाज बोले, कैबिनेट मंत्री को मालूम नहीं होता है कि मंत्रिमंडल बैठक में क्या फैसले लिए गए हैं। धर्मशाला को दूसरी राजधानी घोषित करने की जानकारी ही नहीं थी। मंत्री बाली और कौल सिंह भी अनजान रहे। भारद्वाज ने मंत्रियों की ओर इशारा कर कहा कि इनको नहीं पूछा जा रहा, जबकि सीएम के पीछे मुकेश और सुधीर जरूर बैठते हैं। कहा कि प्रदेश में रोजाना कोई अतिरिक्त मुख्य सचिव बन रहा है। अधिकारी प्रशासनिक ट्रिब्यूनल तक जा रहे हैं।

लिखकर दो, नहीं मिलना चाहिए बेरोजगारी भत्ता

बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक अजय महाजन ने मुख्यमंत्री की बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा को सराहनीय कदम बताया। कहा कि घोषणा के बाद विपक्ष को टेंशन हो गई है। भाजपा इसकी चिंता छोड़े कि बेरोजगारी भत्ता कैसे दिया जाएगा। यदि वे इसके पक्ष में नहीं हैं तो लिखकर दें कि बेरोजगारी भत्ता नहीं मिलना चाहिए। भाजपा को बेरोजगारी भत्ता छोड़कर लोकसभा चुनाव में 15-15 लाख देने का जो वायदा किया गया था, उसको कैसे पूरा किया जाए, इसकी टेंशन करनी चाहिए। सीपीएस सोहनलाल ने कहा कि सरकार ने नए संस्थान खोले हैं।

उससे जनता को फायदा हुआ है। भाजपा विधायक गोविंद ठाकुर ने कहा कि एनजीटी के आदेशों की वजह से कुल्लू-मनाली में बेरोजगारी बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से रोहतांग के लिए केवल हिमाचल के ही टैक्सी ऑपरेटर्स की गाड़ियां जाने पर विचार करने की मांग की। कहा कि शिक्षा विभाग में अहम पद खाली हैं। सरकार ने वरिष्ठता को दरकिनार कर जूनियर को निदेशक पद का एडिशनल चार्ज दिया है।

जो अधिकारी सीनियर था, उसे एडवाइजर बनाया गया है। विधायक विजय अग्निहोत्री ने कहा कि आज प्रदेश का किसान जंगली जानवरों और आवास पशुओं के आतंक से खेती छोड़ने को विवश है। कहा कि एक राजधानी संभलती नहीं है और मान-सम्मान के लिए दूसरी राजधानी बनाई जा रही है। पूछा कि क्या सरकार दूसरे जिलों का सम्मान नहीं करती। विधायक रामकुमार ने बजट को गरीबों के हित का करार दिया।

भाजपा विधायक केएल ठाकुर ने कहा कि बजट में किसी भी वर्ग का ख्याल नहीं रखा गया। विधायक बंबर ठाकुर ने बजट में सभी वर्गों का बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने चंबा, हमीरपुर और नाहन के लिए मेडिकल कॉलेज दिया है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें कॉलेज नहीं चाहिए तो वे सड़कों पर उतर कर उसका विरोध करें।

राजधानी एक ही होगी, धर्मशाला में विंटर कैपिटल

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह वीरवार को पंजाब के नए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में थे। इस दौरान विधानसभा में उनका कामकाज स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने देखा। कौल सिंह इस बीच सदन में सीएम का बार-बार धन्यवाद करते नजर आए। कौल सिंह ने सुरेश भारद्वाज के बजट पर चर्चा पर लगाए आरोपों पर कहा - मुख्यमंत्री ठीक कहते हैं कि विपक्ष क्षेत्रवाद और जातिवाद की ही राजनीति करता आ रहा है।

कहा है कि भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने भाषण में खूब भड़ास निकाली है। उन्होंने ट्रॉमा सेंटर की बात की है। 56 करोड़ से भी एक भवन का निर्माण किया जा रहा है। जहां सुपर स्पेशिएलिटी की बात है तो शिमला में डेढ़ सौ बीघा जमीन पर इसे बनाया जा रहा है। यहां कैंसर अस्पताल और सुपर स्पेशिएलिटी खोली जा रही है। जिस तरह की बातें सुरेश भारद्वाज कर रहे हैं, उससे क्षेत्रवाद की बू आ रही है।

राजधानी एक ही होगी। कैबिनेट में यह मामला लाया गया है कि सेकेंड कैपिटल यानी विंटर कैपिटल धर्मशाला में ही खोली जाए। इसका श्रेय सीएम वीरभद्र सिंह को जाता है। पूरे प्रदेश में विश्वविद्यालय हैं। मंडी में कोई विवि नहीं है। ऐसे में ईएसआई मेडिकल कॉलेज में मेडिकल यूनिवर्सिटी खोलने फैसला खुद सीएम ने लिया है। कहा कि विपक्ष हमेशा क्षेत्रवाद को हवा देती रही है। 

न गगरेट पाकिस्तान में है और न चिंतपूर्णी लाहौल में 

कालिया ने वीरवार को विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेर लिया। कालिया ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए धन का कम आवंटन किया जा रहा है। चिंतपूर्णी में विकास कार्यों के लिए पैसा खर्च हो रहा है, गगरेट में ऐसा क्यों नहीं। गगरेट न पाकिस्तान में है और न ही चिंतपूर्णी लाहौल स्पीति में। उन्होंने कहा कि कर्नल ने उन्हें पत्र लिखकर कहा है कि मुख्यमंत्री से नहीं बनती इसलिए विकास कार्य नहीं हो रहे हैं।

कालिया ने अपने प्रश्न में सरकार से पूछा कि गत चार वर्षों में जिला ऊना की सड़कों के रखरखाव और मरम्मत के लिए कितना धन आवंटित हुआ है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अनुपस्थिति में स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने जवाब दिया कि जिला ऊना में लोनिवि के 8 उपमंडल हैं। ऊना के लिए बीते चार वर्षों में सड़कों के रखरखाव व मरम्मत के लिए लोनिवि को कुल 7454.06 करोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल के सभी विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य हुए हैं। गगरेट के लिए भी विकास कार्यों के लिए राशि जारी की गई है।

‘बंदर पकड़ने का काम मनी मेकिंग स्कीम जैसा’ 
कुटलैहड़ से भाजपा विधायक विरेंद्र कंवर ने वन विभाग में बंदरों को पकड़ने पर सवाल खडे़ किए हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्य में भ्रष्टाचार हुआ है। बंदर पकड़ने का काम मनी मेकिंग स्कीम जैसा हो गया है। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। वीरवार को बजट पर चर्चा करते हुए विधायक ने कहा कि वन विभाग पौधे लगाता है, लेकिन इनका र्स्वाइवल रेट नहीं है। अपने विधानसभा क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सर्दियों में ही पानी नहीं तो गर्मियों में क्या हालत होगी। दो सालों में ऊना जिले में सड़क हादसों में 280 से ज्यादा लोगों की मौतें हुई हैं।

विधानसभा में सवाल उठाया गया तो सरकार ने आश्वासन भी दिया लेकिन हुआ कुछ नहीं। इससे ऐसा लगता है कि विधानसभा में बोलना रास्ते में बोलने जैसा है। उन्होंने कहा कि जगह-जगह स्वास्थ्य केंद्र खोलने के बजाय हर विधानसभा क्षेत्र में सारी सुविधाओं वाला एक-एक अस्पताल होना चाहिए ताकि लोगों को दर-दर न भटकना पडे़।

केंद्र की नहीं हिमाचल सरकार की है कौशल विकास योजना

उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि कौशल विकास योजना शत-प्रतिशत हिमाचल सरकार की योजना है। इसमें केंद्र सरकार का योगदान नहीं है। मुकेश अग्निहोत्री ने यह जानकारी नाचन के विधायक विनोद कुमार के प्रश्न के उत्तर में दी। कहा कि सरकार ने वर्ष 2013 में यह योजना शुरू की थी। इसके लिए हर साल बजट में 100 करोड़ का प्रावधान किया जाता है।

अब तक इस योजना में 124 करोड़ खर्चे गए हैं। योजना से प्रदेश के 1 लाख 62 हजार 553 युवा लाभान्वित हुए हैं। भाजपा विधायक को फोन नंबर के साथ इसकी विस्तृत डिटेल उपलब्ध करवाई है। अब भाजपा इसका श्रेय लेने का प्रयास करेगी।

कहा कि भाजपा विधायक सरवीण चौधरी ने भी चर्चा के दौरान इसे केंद्र की योजना बताया, जबकि ऐसा नहीं है। जिला मंडी में इस योजना के तहत 19,775 युवाओं तथा नाचन विधानसभा क्षेत्र के 2,452 युवा लाभान्वित हुए। योजना को लेकर किसी तरह की शंका न हो, इस कारण मोबाइल नंबर भी दिए गए हैं। 
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पंचायतों से वापस नहीं मांगा जा रहा विकास कार्यों का पैसा

पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि 13वें वित्तायोग में विकास कार्यों के लिए जारी राशि को कई पंचायतें खर्च नहीं कर पाई हैं। यह पैसा पंचायतों से वापस नहीं मांगा जा रहा है। इसे पंचायतों की स्थायी संपत्तियों के निर्माण पर खर्च करने का निर्णय लिया है। सरकार पंचायतों से इसकी अनुशंसा मांग रही है। पंचायतीराज मंत्री ने यह जानकारी भाजपा विधायक गोविंद सिंह ठाकुर के प्रश्न के उत्तर में दी।

गोविंद ठाकुर ने आरोप लगाया कि 13वें वित्तायोग में पंचायतों को जो पैसा जारी हुआ था, कई पंचायतें इसे खर्च नहीं कर रही हैं। अब सरकार पैसा वापस मांग रही है। कई पंचायतों ने पैसा लौटा दिया है, कइयों पर पैसा लौटाने को दबाव बनाया जा रहा है। इस पर मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विकास खंडों के लिए 13वें वित्तायोग में 347 करोड़ की राशि जनरल ग्रांट और 152 करोड़ फारफार्मेंस ग्रांट जारी हुई है।

कई पंचायतों में पैसा खर्च नहीं किया गया। भाजपा विधायकों ने पहले भी अपने प्रश्न में कहा कि जो पैसा खर्च नहीं किया गया है, उसे दूसरे मदों में खर्च किया जाना चाहिए। अब विधायक उसी मद में पैसा जारी करने की बात कह रहे हैं। कहा कि निरमंड को जारी राशि विकास कार्यों पर खर्ची गई है। 
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