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हजारों जलवाहक-डॉक्टर होंगे रेगुलर, सस्ता हुआ लोन, 150 पदों पर भर्ती

Thu, 22 Sep 2016 09:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल मंत्रिमंडल ने स्कूलों में चौदह साल से काम कर रहे करीब दो हजार अंशकालिक जलवाहकों को रेगुलर करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में डेढ़ सौ पदों को भरने की मंजूरी भी दी गई।
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इसके अलावा कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां, शाहपुर और शिमला जिले के कुमारसैन में नए उपमंडल कार्यालय नागरिक खोलने का फैसला लिया गया। बिलासपुर के स्वारघाट में नयनादेवी के लिए उपमंडलाधिकारी नागरिक का दफ्तर खुलेगा। मंडी जिले की उप तहसील धर्मपुर को स्तरोन्नत कर तहसील बनाने को हरी झंडी दी गई है।

बता दें कि उच्च और प्रारंभिक शिक्षा विभाग में वर्ष 1996 की नीति के तहत 27 जुलाई 2001 से पूर्व नियुक्त करीब 2000 दैनिक वेतन भोगी अंशकालिक जलवाहक, जलवाहक और सेवादार नियमित होंगे। यह लाभ उन्हें मिलेगा, जिन्होंने 31 मार्च 2016 को 14 साल का निरंतर सेवाकाल पूरा कर लिया है या 30 सितंबर 2016 को पूरा करेंगे।
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126 आयुर्वेद डॉक्टरों को दी सौगात

केंद्र की ओर से को-लोकेशन आधार पर शुरू की गई स्वास्थ्य सेवाओं के तहत भर्ती हुए 126 आयुर्वेद डॉक्टरों को मंत्रिमंडल ने रेगुलर करने का फैसला लिया है। इन डॉक्टरों को सेवाएं देते हुए पांच साल का समय हो चुका है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि इस योजना के तहत भर्ती हुए आयुर्वेद डॉक्टरों को रेगुलर करने वाला हिमाचल का पहला राज्य बन गया है। हाल ही में आयुर्वेद मंत्री कर्ण सिंह ने इन डॉक्टरों को रेगुलर कराने का प्रस्ताव कैबिनेट में ले जाने का आश्वासन दिया था।

वन विभाग में 108 मल्टीपर्पज वर्कर की होगी भर्ती

प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल की बैठक में वन विभाग में मल्टीपर्पज वर्करों के 108 पदों को भरने की मंजूरी दे दी गई। जल्द इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके अलावा विभिन्न विभागों में विभिन्न श्रेणी के 35 पदों पर भी भर्ती को स्वीकृति दी है।

इसमें उच्च शिक्षा विभाग में ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के आठ पद, नगर निगम शिमला के माडर्न स्लाटर हाउस में सात वेटरनरी अफसर और आठ पैरा वेटरनरियंस के पदों को सृजित करने, हिमाचल प्रदेश चुनाव विभाग में जूनियर आफिस असिस्टेंट (आईटी) के छह पदों को सृजित कर भरने की मंजूरी दी।

इसके अलावा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में तीन और प्रिंटिंग और स्टेशनरी विभाग में चार जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के पदों को भरने, पॉलिटेक्निकल/इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए डिप्टी डायरेक्टर का पदा सृजित कर भरने, हॉस्पिटालिटी एंड प्रोटोकाल विभाग में क्लर्क के दो पद भरने को भी हरी झंडी मिली है।

बिलासपुर के राजकीय कॉलेज जुखाला में एक एसएलए और एक जेएलए के पद को सृजित करने और हमीरपुर जिले के राजकीय कालेज भोरंज में सीनियर असिस्टेंट के एक और जूनियर आफिस असिस्टेंट (आईटी) के एक पद को कांट्रेक्ट बेस पर भरने की मंजूरी दी है।

पढ़ाई के लिए लोन पर चार फीसदी ब्याज सरकार चुकाएगी

हिमाचल में शिक्षा लोन पर चार फीसदी ब्याज अब प्रदेश सरकार चुकाएगी। हिमाचल मूल के विद्यार्थियों को व्यावसायिक, तकनीकी और उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख तक के लोन पर यह सुविधा मिलेगी। बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री ज्ञानदीप योजना को मंजूरी दी गई।

लोन लेने के लिए देश में कहीं भी मान्यता प्राप्त संस्थान से पढ़ाई करना अनिवार्य है। कोर्स पूरा होने के एक साल बाद लोन की वसूली शुरू होगी। सीएम वीरभद्र सिंह ने साल 2016-17 के बजट भाषण में मुख्यमंत्री ज्ञानदीप योजना की घोषणा की थी।

मुख्यमंत्री ज्ञानदीप योजना के तहत यूको बैंक को नोडल बैंक बनाया गया है। लोन लेने के लिए विद्यार्थी किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में आवेदन कर सकते हैं। ब्याज पर सब्सिडी देने वाले बैंकों को सरकार अदायगी करेगी। अन्य बैंकों को यूको बैंक के पास आवेदन करना होगा।

यूको बैंक के माध्यम से केस सरकार को भेजे जाएंगे। सरकार साल में दो बार अप्रैल और सितंबर महीने में बैंकों को अदायगी करेगी। बैंक विद्यार्थियों से लोन की वसूली कोर्स समाप्त होने के एक साल बाद शुरू करेंगे। जमा दो कक्षा पास करने वाले विद्यार्थी मुख्यमंत्री ज्ञानदीप योजना के तहत लोन लेने के लिए पात्र होंगे।

हिमाचल मंत्रिमंडल ने ये फैसले भी लिए

उप तहसील टीहरा को धर्मपुर तहसील में मिलाने और उप तहसील टीहरा से चौलथरा और सधोट पटवार वृत्तों को बाहर करने और इन्हें सरकाघाट तहसील में मिलाने का निर्णय। संधोल तहसील के दो पटवार वृत्तों गोरट और कमलाह को प्रस्तावित धर्मपुर तहसील में मिलाने का फैसला।

सिरमौर जिले की नौहराधार तहसील के पटवार वृत्त चारना, ददाहू तहसील के पटवार वृत्त खाला क्यार, भाटगढ़, कोटी धीमन, जारंग और चंबा जिले के विकास खंड मैहला को दुर्गम क्षेत्र सब काडर में शामिल करने को स्वीकृति।
 
शिमला के उपमोहाल क्यारी यानी रझाणा को नगर निगम शिमला में शामिल करने का फैसला।

ये बड़े फैसले भी लिए गए

कुल्लू बाईपास से बिजली महादेव तक पीपीपी मोड पर रज्जू मार्ग के निर्माण को मंजूरी।

चामुंडा-होली सुरंग तक सड़क के निर्माण पर चर्चा। इस मामले को भारत सरकार के राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण से उठाने का फैसला।

शिमला जिले के रोहडू़ और हमीरपुर जिले के नादौन में जरूरी पदों समेत दो नए नगर योजना कार्यालय खोलने को स्वीकृति।

शिमला जिले के चौपाल में शैक्षणिक सत्र 2017-18 से अनुबंध आधार पर पदों को भरने सहित नया राजकीय डिग्री महाविद्यालय खोलने को मंजूरी।

सिरमौर के संगड़ाह में नए प्राथमिक शिक्षा खंड कार्यालय के सृजन को स्वीकृति।

शिमला के सुन्नी में किसान प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक किसान कल्याण निधि को 10 बीघा जमीन आवंटित करने की मंजूरी।

मानसिक रूप से विकलांग बच्चों के लिए आवासीय संस्थान स्थापित करने की मंजूरी।

सीएम बाल उद्घार योजना में संशोधन को मंजूरी

प्रदेश सचिवालय में हुई बैठक में मंत्रिमंडल ने समेकित शिशु संरक्षण योजना की पूर्ति के लिए जूविनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 से संबद्ध मुख्यमंत्री बाल उद्धार योजना में संशोधन को मंजूरी प्रदान की।

महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक मानसी सहाय ठाकुर ने बताया कि जूविनाइल जस्टिस एक्ट 2015 में आया था जबकि इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम 2012 में हिमाचल में लागू हुई थी।

चूंकि कई वित्तीय सहायता आईसीपीएस के जरिये प्रदेश को मिलनी होती है ऐसे में दोनों के बीच तालमेल के लिए संशोधन किया जा रहा है। वहीं, बैठक में केंद्रीय बिक्री कर (हिप्र) नियम 1970 में जीजी फार्म (इनडेमनिटी बॉंड फार्म) को कंप्यूटराइज्ड डेटा में शामिल करने और तथा नियम 6 व 6 बी में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई।

प्रगतिनगर और नगवाईं में चार साल में लगानी होगी शराब फैक्टरी

हिमाचल के प्रगतिनगर और नगवाईं में इंडेज इंडिया को चार साल के भीतर शराब की फैक्टरी लगानी होगी। नई शर्त के साथ इंडेज इंडिया कंपनी को लीज पर जमीन दी जाएगी। इतने ही समय में यहां पर शराब बनाने की फैक्टरी को स्थापित करना होगा। बुधवार को हिमाचल मंत्रिमंडल ने इस पर फैसला ले लिया।

इस फैक्टरी को स्थापित करने का फैसला वर्ष 2000 में ले लिया गया था। तय नियमों के मुताबिक फैक्टरी स्थापित नहीं होने पर इस संबंध में किए गए एमओयू को वर्ष 2011 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2015 में इसे फिर से जमीन देने का फैसला हुआ।

इस कंपनी को विभाग की जमीन बेचने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा था। बुधवार को ये फैसला लिया गया कि कंपनी को बेचने के बजाय इस जमीन को लीज पर दिया जाएगा। कंपनी की ओर से खरीद के लिए जमा करवाए गए बजट को लीज की राशि के रूप में ही काटा जाता रहेगा।
 
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जंगी थोपन प्रोजेक्ट एसजेवीएन को देने की तैयारी

960 मेगावाट क्षमता वाली जंगी थोपन पोवारी जल विद्युत परियोजना को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को देने का कैबिनेट ने फैसला लिया है। बुधवार को कैबिनेट ने ऊर्जा विभाग को उपक्रमों से बातचीत करने के लिए अधिकृत कर दिया है। बताया जा रहा है कि एसजेवीएन ने पावर प्रोजेक्ट लेने के लिए आवेदन किया है। ऐसे में संभावित है कि अगर अन्य उपक्रमों से बात नहीं बनी तो सरकार जंगी थोपन पोवारी प्रोजेक्ट को एसजेवीएन को आवंटित कर देगी।

साल 2006 में राज्य सरकार ने जंगी थोपन पोवारी पावर प्रोजेक्ट का टेंडर किया था। ब्रेकल को टेंडर आवंटित किया गया था। ब्रेकल ने अदानी से लेकर अपफ्रंट मनी की 280 करोड़ की राशि सरकार को दी थी। बाद में यह मामला न्यायालय में चला गया। न्यायालय ने राज्य सरकार को इस प्रोजेक्ट को अपने स्तर पर फैसला लेने के निर्देश दिए थे। सरकार ने 2009 में इस प्रोजेक्ट के आवंटन को रद्द कर दिया था। वर्तमान सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर मांगे, लेकिन दो बार टेंडर में ज्यादा आवेदन नहीं आने के कारण सरकार ने फैसला लिया था कि इस प्रोजेक्ट को पहले के टेंडर में दूसरी कंपनी को दिया जाए।

यदि वह कंपनी लेने के तैयार नहीं होती है तो फिर से टेंडर मांगेंगे। बीते साल सितंबर महीने में सरकार ने कैबिनेट की बैठक में इस प्रोजेक्ट को रिलायंस को देने का फैसला लिया था, इसमें शर्त लगाई थी कि यदि रिलायंस इसे लेने के लिए तैयार नहीं होता है तो दोबारा से टेंडर आमंत्रित करेगा। रिलायंस ने राज्य सरकार को जंगी थोपन प्रोजेक्ट को कैबिनेट में हुए फैसले की शर्तों के आधार पर लेने की सहमति दे दी थी। सरकार को रिलायंस कंपनी से लिखित में इसका पत्र भी मिला था।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट को औपचारिक तौर पर रिलायंस को सौंपा जाना था। रिलायंस से अपफ्रंट मनी आने के बाद राज्य सरकार ने ब्रेकल से आई 280 करोड़ की अपफ्रंट मनी अदानी को वापस करनी थी। लेकिन कैबिनेट बैठक में अपफ्रंट मनी को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया।
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