अधिकारियों को धड़ाधड़ चिट्ठियां भेज रहा निगम
इस बकाया राशि की वसूली के लिए इन दिनों पर्यटन निगम संबंधित अधिकारियों को धड़ाधड़ चिट्ठियां भेज रहा है और उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सख्त रुख से भी अवगत करवाया जा रहा है। वीरभद्र और जयराम सरकारों में गुड़िया दुराचार व हत्या मामले की जांच के दौरान सीबीआई की टीम का महीनों तक ठहराव और खानपान का राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में प्रबंध किया जाता रहा। इसका बिल 21.96 लाख रुपये बना। इस बकाया राशि की वसूली के लिए पर्यटन निगम के पीटरहॉफ में नियुक्त सहायक महाप्रबंधक ने राज्य सरकार के अतिरिक्त सचिव पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन को पिछले दिनों एक ताजा चिट्ठी भेजी है।
इसमें कहा गया है कि एचपीटीडीसी के कॉरपोरेट कार्यालय ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश का उल्लेख करते हुए लंबित राशि को रिकवर करने को कहा है। ऐसे में अनुरोध है कि इस धनराशि को वसूल करने में हस्तक्षेप किया जाए। यह सीबीआई के अधिकारियों की बोर्डिंग और लॉजिंग का खर्च है। सीबीआई की ओर से पहले ही दो टूक जवाब निगम को भेजा जा चुका है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार इस खर्च का वहन राज्य सरकार को ही करना था। कई अन्य सरकारी विभागों और निजी क्षेत्र के अन्य लोगों के लिए भी पत्र भेजे गए हैं।
सीबीआई से 21.96 लाख रुपये वसूली हो या अन्य सरकारी और निजी मामले ही हों। इसके लिए सभी को पत्र लिखे गए हैं। इसकी जानकारी कोर्ट को भी सौंपी जाएगी। - राजीव कुमार, प्रबंध निदेशक, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम, शिमला
सख्ती ः पर्यटन निगम ने 17 दिन में वसूले 2.69 करोड़
शिमला। उच्च न्यायालय की ओर से कड़ा संज्ञान लेने के बीच पर्यटन निगम ने हरकत में आते हुए करोड़ों रुपये की रिकवरी कर ली है। निगम ने 31 अक्तूबर 2024 से 7 नवंबर के बीच 2,15,29,773 रुपये रिकवरी कर लिए हैं। 7 नवंबर से 17 नवंबर के बीच 54,27,813 रुपये रिकवर किए। यानी 17 नवंबर तक कुल 2,69,57,586 रुपये वसूल लिए हैं। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम का 31 दिसंबर 2024 तक सरकारी विभागों और उपक्रमों के पास 4,13,41,848 रुपये बकाया था। इसमें से 7 नवंबर तक 1,68,22,370 रुपये की रिकवरी कर ली गई। निजी क्षेत्र का 1,06,28,421 रुपये बकाया था और 7 नवंबर 2024 तक 47,07,403 रुपये 7 नवंबर तक रिकवर कर लिया गया। यानी 31 अक्तूबर 2024 तक 5,19,70,269 रुपये आउटस्टैंडिंग था, जिसमें से 7 नवंबर 2024 तक 2,15,29,773 रुपये की रिकवरी की गई। 7 नवंबर तक सरकारी क्षेत्र में 2,45,19,478 रुपये और निजी क्षेत्र में 59,21,018 रुपये बकाया था।