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सरकार को झटका, राजभवन ने रोका विवादित टीसीपी संशोधन विधेयक

Thu, 22 Sep 2016 07:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राजभवन ने टीसीपी संशोधन विधेयक फिलहाल रोक दिया है। इस विवादित विधेयक को छोड़ कर तकरीबन सभी विधेयकों को मंजूरी दे दी गई है। टीसीपी विधेयक में लाए गए प्रावधानों को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक बताया है।
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हाईकोर्ट का कहना है कि सरकार इस तरह का कोई कानून नहीं बना सकती जिससे जनहित प्रभावित हों। राजभवन के सूत्रों का कहना है कि इस विधेयक पर कानूनी विचार विमर्श के बाद ही राज्यपाल कोई फैसला लेंगे। अभी राज्यपाल हिमाचल से बाहर हैं।

बताते चलें कि हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने इसे गैर कानूनी ठहराते हुए कहा था कि अवैध निर्माण नियमित नहीं किए जाने चाहिए।  हिमाचल हाईकोर्ट ने अमर उजाला के 20 अगस्त 2016 के अंक में ‘अवैध भवनों को वैध बनाने के इस अंधे कानून का क्या करें’ शीर्षक से प्रकाशित सरोकार पर संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की थी।
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प्रदेश सरकार की ओर से बीते दिनों कई विधेयक राजभवन भेजे गए थे। शहरी विकास विभाग के दो अन्य विधेयकों को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी लेकिन टीसीपी विधेयक को रोक लिया। सूत्र बताते हैं कि राज्यपाल को इस विधेयक को मंजूरी देना आसान नहीं होगा।

हाईकोर्ट में दो वरिष्ठ न्यायाधीशों की खंडपीठ जिस प्रस्तावित कानून को अवैध मान रही हो, सूबे का मुखिया होने के कारण राजभवन उसे सही कैसे ठहरा सकता है? अवैध रूप से भवन निर्माण करने वालों के भवन वैध करना सूबे के उन लाखों नागरिकों की भावनाओं को आघात होगा, जिन्होंने नियम-कानून के तहत अपने भवन बनवाए हैं। प्रदेश भर की जनता में इस प्रस्तावित कानून को लेकर विरोध है।
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नियमों को ताक पर रखकर बेतरतीब ढंग से हुआ है निर्माण

सूबे के हजारों लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर बेतरतीब ढंग से भवनों का निर्माण किया है। जिन क्षेत्रों में चार प्लस वन मंजिला भवन स्वीकृत है, वहां छह से सात मंजिलों का निर्माण किया गया है। विभाग के अधिकारियों ने भी इन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

हालत यह है कि लोगों ने बिना सेटबैक छोड़े सरकार की मंजूरी के बगैर भवनों का निर्माण कर दिया। यही नहीं, जब से यह विधेयक विधानसभा से पारित हुआ है, तब से लोगों ने एक महीने के भीतर अवैध भवन खड़े कर दिए। अब सरकार ने इन भवनों को नियमित करने के लिए इस विवादित टीसीपी विधेयक को राजभवन की मंजूरी के लिए भेजा है, जहां इसे रोका गया है।
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