वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोगों को राहत पहुंचाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने अंतरिम नीति बनाने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया।
बैठक में तय हुआ कि प्रदेश सरकार छोटे व मंझोले किसानों और समाज के गरीब वर्ग के लोगों जिन्होंने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किए हैं उनके लिए अंतरिम नीति प्रस्तुत करेगी। इसके अलावा वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रावधानों की भी जांच की जाएगी ताकि स्थायी हिमाचली वन वासियों को चिह्नित कर उनके अधिकारों को निर्धारित किया जा सके।
राजस्व मंत्री कौल सिंह ने साफ किया कि प्रदेश सरकार सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ है लेकिन किसी मजबूरी के कारण जिन छोटे व मंझोले किसानों ने सरकारी भूमि पर भवनों का निर्माण अथवा कब्जे किए हैं उनको सरकार राहत देना
चाहती है। मानवीय आधार पर प्रदेश विधानसभा में अवैध कब्जों के नियमितीकरण के लिए प्रस्ताव पारित किया गया है परंतु उच्च न्यायालय ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए विभिन्न आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट से सभी मामलों की एक ही जगह सुनवाई करने का आग्रह
स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर
- फोटो : फाइल फोटो
प्रदेश सरकार शीघ्र ही उच्च न्यायालय के समक्ष कानून के निर्धारित मापदंडों के आधार पर नीति बनाकर प्रस्तुत करेगी ताकि प्रदेश के छोटे व मंझोले किसानों व गरीब लोगों को राहत दिलाई जा सके। वहीं, इस संबंध में हाईकोर्ट से भी आग्रह किया जाएगा कि वह विभिन्न अदालातें में इस संबंध में चल रहे मामलों को विशेष अदालत में ट्रांसफर कर एक साथ सुनवाई करें।
ठाकुर ने बताया कि 7 फरवरी को अगली बैठक तक समिति के सदस्यों को नीति व योजना का प्रारूप प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। उच्च स्तरीय समिति के सदस्य वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, आयुर्वेद मंत्री कर्ण सिंह, विधानसभा के उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी, मुख्य संसदीय सचिव रोहित ठाकुर व नंद लाल, विधायक मोहन लाल बराकटा, अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण श्रीधर, प्रधान सचिव आरडी धीमान, सचिव मोहन चौहान, कानून सचिव डा बलदेव सिंह और विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।