कुनिहार में जनसभा के दौरान कांग्रेसियों ने सीएम वीरभद्र सिंह से अर्की विधानसभा से चुनाव लड़ने की मांग बुलंद की है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह अर्की विधानसभा क्षेत्र के सभी वरिष्ठ कांग्रेस जनों की आम राय है कि वे वीरभद्र सिंह को आगामी विधानसभा चुनाव में अर्की से कांग्रेस का उम्मीदवार देखना चाहते हैं।
पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य राजेंद्र ठाकुर और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंच से मुख्यमंत्री से अर्की से चुनाव लड़ने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री इस मांग पर हल्की मुस्कराहट के साथ चुप रहे। उन्होंने कांग्रेसियों को एकजुट होने का आग्रह किया। कहा कि पार्टी की सुदृढ़ता तथा क्षेत्र के विकास के लिए निजी हितों को छोड़कर सभी को एकत्रित होना होगा।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कुनिहार में पूर्व मंत्री हरिदास ठाकुर की 33वीं पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। सीएम ने महाराजा पदम सिंह मेमोरियल स्टेडियम का लोकार्पण और बुशैहर रियासत के पूर्व शासक स्व. महाराजा पदम सिंह की प्रतिमा का भी अनावरण किया।
उन्होंने जनसभा के दौरान कहा कि षड्यंत्रों में लिप्त लोग कभी सफल नहीं होते हैं और अंत में हमेशा सच्चाई की जीत होती है। केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि कोई भी देश अपने अतीत को अनदेखा कर आगे नहीं बढ़ सकता है। अतीत से सीख कर ही आगे बढ़ा जा सकता है।
कुछ लोग धर्म और हिंदुत्व के नाम पर जनता को विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं। भारत एक धर्म निरपेक्ष राज्य है और हमें धर्म के नाम पर विभाजित करने के बजाए सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह और मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल भी इस दौरान मौजूद रहे।
वीरभद्र के लिए पहाड़ से नीचे उतरना होगा बड़ी चुनौती
बेशक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह एलान किया है कि वह उस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, जहां से कांग्रेस कभी न जीती हो मगर पहाड़ से नीचे उतरना उनके लिए चुनौती से कम नहीं होगा। अगर सीएम ऐसा कर पाएं तो यह हिमाचल प्रदेश की राजनीति में नया इतिहास रच जाएंगे। निचले हिमाचल के ही कई ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें भाजपा दशकों से जीतती आ रही है। इनमें ज्यादातर सीएम वीरभद्र सिंह के सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के गृह क्षेत्र हमीरपुर संसदीय हलके में ही हैं।
हालांकि, ऐसे कुछ हलके सीएम वीरभद्र सिंह की लोकसभा सीट रही मंडी में भी हैं। दूसरी ओर सीएम के एलान के बाद भाजपा नेता इंतजार कर रहे हैं कि ऊंट पहाड़ के नीचे कब आएगा? सीएम की इस घोषणा से आम लोग, राजनेता तक पहेलियां बुझाने लगे हैं कि ऐसा कौन सा निर्वाचन क्षेत्र है, जहां से कांग्रेस कभी चुनाव नहीं जीती।
ये पहेलियां सोशल मीडिया की पोस्ट से लेकर आम चर्चा तक में बूझने लगी हैं। हालांकि, चर्चा में शामिल तमाम लोगों को ऐसा कोई क्षेत्र नजर नहीं आ रहा है। इसके बावजूद प्रदेश के कुछ निर्वाचन क्षेत्र जरूर ऐसे हैं, जहां पर कांग्रेस पिछले कई दशकों से खाता नहीं खोल पाई है। इनमें संसदीय क्षेत्र हमीरपुर के भोरंज, ऊना सदर, कुटलैहड़ जैसे क्षेत्र हैं।
हमीरपुर में जिस सीट से नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल विधायक हैं, वहां भी कांग्रेस पिछले दो कार्यकाल में चुनाव नहीं जीत पाई है। मंडी संसदीय क्षेत्र में ऐसे क्षेत्र सिराज, धर्मपुर आदि हैं। बाकी दो टेन्योर में जहां कांग्रेस खाता नहीं खोल पाई, वैसे हलके तो सभी संसदीय क्षेत्रों में हैं। शिमला में केवल शिमला शहरी सीट ही ऐसी है, जहां भाजपा पिछले दो टेन्योर लगातार जीती है। कांगड़ा में विधायक सरवीण चौधरी की सीट पर भाजपा दूसरी बार जीती है।
कई अन्य नेता भी लड़वाना चाह रहे बेटी-बेटों से चुनाव
वीरभद्र के लिए अपर शिमला सबसे ज्यादा सुरक्षित है। शिमला संसदीय क्षेत्र के अर्की, शिमला शहर, ठियोग, चौपाल, पांवटा आदि में से वे कहीं से भी चुनाव लड़ सकते हैं। इससे नीचे जाना चाहे तो वे निचले हिमाचल के भोरंज या हमीरपुर जैसे हलके में भी जोर आजमाइश कर सकते हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो सीएम वीरभद्र सिंह संभव है कि ऐसा जोखिम न ही लें। उन्होंने प्रदेश के सियासी मिजाज को भांपने के लिए यह बयान दिया हो।
हालांकि, सीएम वीरभद्र सिंह ने वर्ष 1990 में जनता दल के प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर के खिलाफ जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। साथ ही उन्होंने अपने परंपरागत निर्वाचन क्षेत्र रोहडू़ से भी चुनाव लड़ा था। उस समय वे रोहडू़ से तो चुनाव जीते थे, जबकि जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र से रामलाल ठाकुर को नहीं हरा पाए थे। ऐसे में वह इस बार फिर दोहरा चुनाव लड़ने का जोखिम लेंगे या नहीं, यह भी बड़ी पहेली है। वीरभद्र सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वह धूमल के रास्ते में नहीं आएंगे।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जिस तरह से अपने बेटे विक्रमादित्य सिंह को चुनाव लड़ाना चाह रहे हैं, उसी तर्ज पर कई अन्य नेता भी अपनी संतान का भविष्य संवारना चाह रहे हैं। इनमें अंदरूनी तौर पर सबसे सक्रिय मंत्री जीएस बाली माने जा रहे हैं। बाली कांगड़ा सीट से अपने बेटे रघुवीर बाली के लिए टिकट चाह रहे हैं।
इनके अलावा कौल सिंह ठाकुर अपनी बेटी चंपा ठाकुर, वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी अपने बेटे अमित भरमौरी, बृज बिहारी लाल बुटेल बेटे आशीष बुटेल, टेकचंद डोगरा अपने बेटे संजय डोगरा, अनिल शर्मा अपने बेटे आश्रय शर्मा, रामलाल ठाकुर के बेटे विकास ठाकुर का राजनीतिक भविष्य बनाने के लिए चुनाव लड़ाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ लोग राजनीति से संन्यास लेकर खुद की सीट अपने बच्चों के लिए छोड़ने को भी तैयार माने जा रहे हैं।
पहले नोटिफिकेशन जारी करो फिर बनेगी डीपीआर
सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि अभी हिमाचल के विकास के लिए बहुत कुछ करना बाकी है। हालांकि उन्होंने विकास के लिए बहुत कुछ किया है। लेकिन जो बचा है वह आने वाले वर्षों मे पूरा किया जाएगा। उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्ती बरतने की बात कही। कहा कि केंद्र सरकार ने प्रदेश में कई नए मार्गों की घोषनाणाएं की हैं। लेकिन जिनकी नोटिफिकेशन आज तक जारी नहीं हुई।
नोटिफिकेशन के बाद मार्गों की नाप-नपाई का कार्य होगा और उसके बाद डीपीआर तैयार की जाएगी। सीएम शनिवार सांय नालागढ़ विश्रामगृह में पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पंजाब में कांग्रेस पार्टी प्रचंड बहुमत से सत्ता हासिल करेगी। कैप्टन अमरेंद्र सिंह के नेतृत्व में सरकार बनेगी। अकाली भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो गई।
उन्होंने कहा कि वह रविवार को पंजाब के चुनावी दौरे पर हैं और पांच जन सभाओं का संबोधित करेंगे। पंजाब के भरतगढ़, देहणी, आगमपुरा, नया नंगल, गढ़शंकर में उनकी चुनावी जन सभाएं प्रस्तावित हैं। इस दौरान उन्होने अकाली भाजपा गठबंधन पर प्रहार करते हुए कहा कि गठबंधन सरकार के समय पंजाब का विकास ठप हो गया और उद्योग की रफतार भी थम गई।
हर वर्ग सरकार से खफा है। उन्होंने अकाली भाजपा पर आरोप जड़ते हुए कहा कि पंजाब नशे का कारोबार फला-फूला है। उन्होने केंद्र सरकार की नोटबंदी पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि नोटबंदी से देश की ईकनोमी पर असर पड़ा है। इस मौके पर उनके साथ रामलाल ठाकुर, विक्रमादित्य, हरदीप बावा, लखविंद्र राणा, अवतार सिंह सैणी, महेश गौतम मौजूद रहे।