गुरुवार को श्रीनगर में प्रेस वार्ता में सीएम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि और बागवानी पर निर्भर हैं। हिमाचल में सेब बागवानी से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग 5,000 करोड़ रुपये का योगदान है और यह 2.5 लाख परिवारों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका का आधार है। इसके लिए केंद्र से कोई भी सहायता या समर्थन नहीं मिला, यह बागवानों के साथ सीधा अन्याय और हिमाचल तथा जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों की आर्थिकी पर प्रहार है। सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने न्यूजीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जिनके तहत सेब और सूखे मेवों पर आयात शुल्क में कमी की गई है।
दुर्व्यवहार की घटनाओं पर होगी कार्रवाई
उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के किसानों व बागवानों को सीधा नुकसान होगा। विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार किसानों और आम जनता की आवाज उठा रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार उन्हें बोलने से रोकने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस किसानों और बागवानों के साथ मजबूती से खड़ी है तथा उनके अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी। कुछ कश्मीरी शॉल बेचने वालों से हिमाचल में किए गए दुर्व्यवहार पर सीएम सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने भी उन्हें इस पर फोन किया, जिस पर तुरंत कार्रवाई की गई। ऐसा करने वालों को 24 घंटों के अंदर गिरफ्तार भी कर लिया गया। कश्मीरी भाई हिमाचल प्रदेश में सदियों से आते हैं। कई बार कुछ लोग रील बनाने के चक्कर में इस प्रकार की वारदातों को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार की घटना एक या दो हुई होंगी। कश्मीर से आए लोग हिमाचल प्रदेश में शांति और अमन से रहते हैं। ऐसी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। उनका यह मानना है कि वे यहां खुलकर अपना काम और व्यापार करें।