सुधीर शर्मा जीत के बाद समर्थकों के साथ।
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विधानसभा उपचुनाव में धर्मशाला विस में सुधीर शर्मा का बेहतर चुनाव प्रबंधन काम कर गया। यही कारण है कि पार्टी बदलने के बाद भी सुधीर शर्मा ने पिछले चुनाव के मुकाबले 3,326 मतों से रिकॉर्ड जीत दर्ज की। सुधीर यहां से लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में सफल रहे। हालांकि, वह विपक्ष में बैठेंगे। 1993 के बाद पहली मर्तबा धर्मशाला से चुनाव जीतने वाला विधायक विपक्ष में बैठेगा। यहां से विधायक सरकार के साथ चला है। 1993 में धर्मशाला सीट से भाजपा के पूर्व मंत्री और सांसद किशन कपूर ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 1993 से 1998 तक की वीरभद्र सिंह की सरकार में उन्हें विपक्ष में बैठना पड़ा था।
पूर्व में चार बार विधायक और मंत्री रहे सुधीर शर्मा अपने लंबे सियासी अनुभव, बेहतर चुनाव प्रबंधन, भाजपा के मजबूत संगठन की बदौलत पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे हैं। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र सिंह जग्गी की हार का प्रमुख कारण देरी से टिकट का फाइनल होना, चुनाव प्रचार के लिए बहुत कम समय मिलना, कमजोर संगठन, सियासी अनुभव की कमी और ओबीसी वोट बैंक पर मजबूत पकड़ न बना पाना रहा। निर्दलीय प्रत्याशी राकेश चौधरी ने चुनाव में 10,770 वोट लिए। ओबीसी वोट बैंक शुरू से कांग्रेस के साथ चलता रहा है, लेकिन अपने समुदाय से प्रत्याशी के कारण इस बार यह वोट कांग्रेस में शिफ्ट नहीं हो पाया। चौधरी ने भी कांग्रेस की नैया डूबोने में अहम भूमिका निभाई। संवाद