घुमारवीं से कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी ने हिमाचल में वन मंजूरी न मिलने से रुके विकास कार्यों और 1980 से पहले बने स्कूल को फारेस्ट क्लीयरेंस न मिलने को लेकर संकल्प प्रस्ताव लाया। उन्होंने सरकार से ये मामले निपटाने के लिए नीति बनाने की मांग की। धर्माणी ने कहा कि हिमाचल में बड़ी संख्या में सड़कें, स्कूल हैं, जो बिना वन मंजूरी बनाए गए हैं। इनमें काफी संख्या में 1980 से पहले बने हैं। 13 तरह के कार्यों के लिए एक हेक्टेयर तक भूमि के लिए एफसीए की मंजूरी जरूरी नहीं है। इसके लिए एफआरए के तहत मंजूरी देने का प्रावधान है।
ग्रामीण विकास विभाग, अन्य विभागों या अन्य प्लान के तहत बनी सड़कों को पक्का करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लाहौल-स्पीति का पॉलिटेक्नीक कॉलेज भी फंसा है। चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र की 70 सड़कें फारेस्ट क्लीयरेंस के कारण फंसी हैं। विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि देव समाज आस्था का प्रतीक है। सैकड़ों मंदिर और गोसदन का निर्माण कार्य फंसा है। विधायक देवेंद्र भुट्टो केवल सिंह पठानिया, संजय रत्न, सुरेंद्र शौरी, विनोद कुमार, भुवनेश्वर गौड़ और सीपीएस रामकुमार, संजय अवस्थी, मोहन लाल ब्राक्टा ने भी मामले उठाए।